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टीवी से कभी दूर नहीं रही : रक्षंदा खान

अभिनेत्री रक्षंदा खान एक वर्ष के लंबे अंतराल के बाद टेलीविजन पर वापसी कर रही हैं। सहारा वन पर प्रसारित हो रहे राजश्री प्रोडक्शन्स के धारावाहिक 'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' में कुसुम के किरदार में उन्होंने हाल ही में प्रवेश किया है। हमने उनसे कई मुद्दों पर बात की�
आप एक वर्ष के अंतराल के बाद टेलीविजन पर वापसी कर रही हैं। इस दौरान कहां व्यस्त रहीं?
यह मेरे लिए कमबैक की तरह नहीं है। मैं महज थोड़े अंतराल के बाद कोई धारावाहिक कर रही हूं। भगवान की दया से मैं उन भाग्यशाली लोगों में से हूं, जिनके पास एक और वैकल्पिक करिअर है। मैं एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी चला रही हूं, इसलिए जब मैं शूटिंग नहीं कर रही होती हूं, तब भी मेरे पास नौ से पांच की एक नौकरी होती है। इस दौरान मैं ऑफिस जाती हूं और लोगों से मिलती-जुलती हूं। यह मेरे लिए शूटिंग की तरह नहीं है, जहां मुझे ऑर्डर मानने पड़ते हैं, बल्कि यहां पर मैं लोगों को ऑर्डर दे सकती हूं। इसके बावजूद, शूटिंग करना ज्यादा आरामदायक है, क्योंकि यहां पर स्क्रीन के मुकाबले अधिक गंभीरता से काम करना होता है। इसके अतिरिक्त, आप प्रत्येक काम के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि शूटिंग के दौरान आपने जो शॉट दिया है, उसके लिए आप जिम्मेदार नहीं होते हैं। इसके लिए निर्देशक जिम्मेदार होता है। सेट पर जीवन वाकई में अधिक सहज होता है।
एक बार फिर कैमरे के सामने आकर कैसा महसूस कर रही हैं?
इस भूमिका को निभाने का बड़ा कारण है कि धारावाहिक के साथ एक प्रसिद्ध प्रोडक्शन हाउस का नाम जुड़ा है। मैंने इस प्रोडक्शन हाउस और यहां के लोगों के विषय में काफी अच्छी बातें सुन रखी हैं। मैं वाकई में इनके साथ काम करना चाहती थी। यदि उनकी ओर से मुझे कोई छोटी- सी भूमिका भी सौंपी जाती, तब भी मैं इसके लिए राजी हो जाती। हालांकि, यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे एक अच्छा किरदार निभाने का अवसर मिला है। मैंने इस धारावाहिक के लिए जो पहला शॉट दिया, वह काफी आसान था, क्योंकि इसमें सिर्फ मेरे पांव दिखाए गए थे। भारतीय टेलीविजन में एक प्रथा है कि जब भी एक नए किरदार का प्रवेश होता है, उसको एक बड़ा सा बिल्डअप देते हैं। इस धारावाहिक से पहले मैंने 'अम्मा जी की गली' में मुख्य किरदार निभाया था, जो लगभग एक वर्ष पहले प्रसारित होता था। इस बीच मैंने 'फुलवा' और कई अन्य धारावाहिकों में छोटे-मोटे किरदार निभाए। इसलिए, वास्तव में मैं लंबे समय से टेलीविजन से दूर नहीं थी।
क्या आपको इंडस्ट्री में कोई बदलाव नजर आया?
हां, टेलीविजन पर काफी कुछ बदल गया है। आज से छह-सात वर्ष पहले का समय टेलीविजन के लिए सुनहरा युग (गोल्डेन पीरियड) कहा जा सकता है। उस दौरान पर्दे पर कलाकारों का राज था और वे खुद काम करने के घंटों का निर्धारण करते थे। लेकिन अब समय बदल गया है। मेरा मानना है कि यह बदलाव इंडस्ट्री के लिए अच्छा है, क्योंकि अब हर चीज अधिक संगठित हो गई है।
आजकल कुछ एपिसोड्स के बाद ही कहानी में जनरेशन लीप दिखा दिया जाता है। आपके किरदार के प्रवेश के बाद इस सीरियल की कहानी में भी बदलाव आएगा?
लोगों के बीच पहले से ही समीकरण निर्धारित किए जा चुके हैं और सभी किरदारों के बीच की केमिस्ट्री भी निर्धारित की जा चुकी है। अब धारावाहिक में कुछ ऐसे कारक होने चाहिए, जिससे दर्शकों को कुछ नया देखने के लिए मिल सके। कहानी में कोई नया मोड़ आने से या किसी नए किरदार के प्रवेश से कलाकारों के बीच के समीकरण आकर्षक बने रहते हैं और दर्शकों को भी बोरियत से छुटकारा मिलता है। मैं धारावाहिक में जो किरदार निभाने जा रही हूं, वह कुछ ऐसा ही है।
'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' में अपने किरदार कुसुम के विषय में कुछ बताएं?
कुसुम के चेहरे पर भले ही एक मीठी-सी मुसकुराहट हो, लेकिन यह किरदार कपटपूर्ण हो सकता है। उसका उद्देश्य अप्रत्यक्ष हो सकता है, लेकिन यह उसे बुरा नहीं बनाता। उसके लिए विभिन्न स्तर हैं। वह एक बिजनेस वुमन है और उसका एक परिवार भी है, जिसका खुलासा अगले एपिसोड्स में होगा। हालांकि, वह परिवार का एक हिस्सा बन जाती है, उसका अपना एजेंडा है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि धारावाहिक की कहानी आगे क्या मोड़ लेगी।
ऐसा माना जा रहा है कि कुसुम का किरदार ग्रे है, लेकिन आपका कहना है कि इस किरदार से कुछ अच्छाई की अपेक्षा भी की जा सकती है?
हममें से कितने लोग ऐसे हैं, जिनके जन्म के समय से ही सिर पर एक तेजमंडल होता है? या फिर दानव की तरह उसके सींग होते हैं? दुनिया में भयावह से भयावह इंसान में भी कुछ अच्छाइयां छिपी होती हैं। तो फिर, टेलीविजन के किरदार के साथ ऐसा क्यों नहीं हो सकता है?
किरदार को स्वीकार करने से पहले किन बातों का ख्याल रखती हैं?
मैं इस बात पर विचार करती हूं कि किरदार के कितने रंग हैं? क्या इस किरदार में टिके रहने की शक्ति है? या फिर कुछ एपिसोड के बाद यह भूमिका क्षीण पड़ जाएगी? दरअसल, किरदार का अपना असर होना चाहिए, चाहे आप कोई छोटा-सा कैमियो ही क्यों न कर रहे हों। यदि कोई किरदार लोगों के मन में अपनी छाप छोडऩेे में सक्षम है, तो मैं निश्चित रूप से इस तरह की भूमिका निभाना पसंद करूंगी।
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