चीनी राखियों से घरेलू कुटीर उद्योग तबाह

चीनी राखियों से घरेलू कुटीर उद्योग तबाह

वाणिज्य प्रतिनिधि . भोपाल
राखी का त्यौहार हर घर में उमंग और उत्साह से मनाया जाता है। खास तौर पर बहनों में इस त्यौहार को लेकर खासा उत्साह है। कई बहने ऐसी भी हैं जिनके भाई नहीं हैं। यह बहनें भी किसी न किसी को राखी बांधकर भाइयों की कमी को पूरा करती है।
इस बार आप जब राखी खरीदने बाजार जाएंगे तो कुछ ज्यादा ही फैशनेबल और रंग-बिरंगी, कार्टून करेक्टर से सजी राखियां देखने को मिलेंगी। देखने में चटखदार ये राखियां न सिर्फ  बच्चों को आकर्षित कर रही हैं, बल्कि बड़ेे भी इसके आकर्षण से नहीं बच पा रहे हैं। चीन से आ रही ये राखियां भले ही लोगों को आकर्षित कर रही हों,लेकिन इससे जहां एक तरफ  हमारा घरेलू उद्योग तबाह हो रहा है। बताया कि इस बार तो रिकॉर्ड मात्रा में राखियों का आयात हुआ है। राखियां बनाने के लिए भारत में कोई कारखाना नहीं है,बल्कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता एवं कुछ अन्य शहरों में ये थोक बाजार की आसपास की बस्तियों और मोहल्लों में बनाई जाती हैं। रक्षा बंधन से दो महीने पहले लोग बाजार से कच्चा माल ले आते हैं और उसे बना कर फिर उसी दुकान पर दे आते हैं। बदले में उन्हें मजदूरी मिल जाती है। वैसे तो अब भी ऐसा हो रहा है, लेकिन इसकी संख्या घट गई है। विके्रता बताते हैं कि चीन से आई राखियां फैंसी होती हैं, इसलिए वे हाथों-हाथ बिक जाती हैं जबकि यहां बनी राखियां देखने में वैसी नहीं रहती हैं और दाम भी ज्यादा रहता है। चीन की राखियां क्यों सस्ती पड़ती हैं।