जब सूर्य को निगल गए हनुमान जी
By dsp On 12 Mar, 2014 At 12:45 PM | Categorized As समाज/धर्म/जीवनशैली | With 0 Comments
जब सूर्य को निगल गए हनुमान जी

जब सूर्य को निगल गए हनुमान जी

एक बार की बात है माता अंजनि हनुमानजी को कुटि में लिटाकर कहीं बाहर चली गयीं। थोड़ी देर में इन्हें तेज भूख लगने लगी। इतने में आकाश में सूर्य भगवान उगते हुए इन्हें दिखायी दिये। इन्होंने समझा कि यह कोई लाल लाल सुंदर मीठा फल है। बस एक ही छलांग में वह सूर्य भगवान के निकट जा पहुंचे और उन्हें पकड़कर अपने मुंह में रख लिया। सूर्य ग्रहण का दिन था, राहु सूर्य को ग्रसने के लिए उनके पास पहुंच रहा था। उसे देखकर हनुमानजी ने सोचा यह कोई काला फल है, इसलिए उसकी ओर भी झपटे। राहु किसी तरह भागकर देवराज इंद्र के पास पहुंचा। उसने कांपते स्वरों में कहा, ‘भगवन् आज आपने यह कौन सा दूसरा राहु सूर्य को ग्रसने के लिए भेज दिया? यदि मैं भागा ना होता तो वह मुझे भी खा गया होता।राहु की बातें सुनकर देवराज इंद्र को बड़ा अचंभा हुआ। वह अपने सफेद हाथी पर सवार होकर हाथ में वज्र लेकर बाहर निकले। उन्होंने देखा कि एक वानर बालक सूर्य को मुंह में दबाए आकाश में खेल रहा है। हनुमान ने भी सफेद ऐरावत पर इंद्र को देखा। उन्होंने समझा कि यह कोई खाने लायक सफेद फल है। वह उधर भी झपटे। यह देखकर देवराज इंद्र बहुत ही क्रोधित हो उठे। उन्होंने खुद को अपनी ओर झपटते हनुमान से बचाया और सूर्य को छुड़ाने के लिये हनुमान की ठुड्डी पर वज्र का तेज प्रहार किया। वज्र के प्रहार से हनुमान का मुंह खुल गया और वह बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े।हनुमान के गिरते ही उनके पिता वायु देवता वहां पहुंच गये। अपने बेहोश बालक को उठाकर उन्होंने गले से लगा लिया। माता अंजनि भी वहां दौड़ती हुई आ पहुंचीं। हनुमान को बेहोश देखकर वह रोने लगीं। वायु देवता ने क्रोध में आकर बहना ही बंद कर दिया। हवा के रुक जाने के कारण तीनों लोकों में प्राणी व्याकुल हो उठे। पशु, पक्षी बेहोश हो होकर गिरने लगे। पेड़ पौधे और फसलें कुम्हलाने लगीं। ब्रह्माजी इंद्र सहित सभी देवताओं को लेकर वायु देवता के यहां पहुंचे। उन्होंने अपने हाथ से छूकर हनुमान को जीवित करते हुए वायु देवता से कहा, वायु देवता आप तुरंत बहना शुरू करें क्योंकि वायु के बिना हम सब लोगों के प्राण संकट में पड़ गये हैं। यदि आपने बहने में जरा भी देरी की तो तीनों लोकों के प्राणी मौत के मुंह में चले जाएंगे। आपके इस बालक को आज सभी देवताओं की ओर से वरदान प्राप्त होगा। ब्रह्माजी की बात सुनकर सभी देवताओं ने कहा कि आज से इस बालक पर किसी प्रकार के अस्त्र शस्त्र का प्रभाव नहीं पड़ेगा। इंद्र ने कहा, मेरे वज्र का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसकी ठुड्डी (हनु) वज्र से टूट गयी थी इसलिए आज से इसका नाम हनुमान होगा।ब्रह्माजी ने कहा वायुदेव तुम्हारा यह पुत्र बल बुद्धि विद्या में सबसे बढ़ चढ़कर होगा। तीनों लोकों में किसी भी बात में इसकी बराबरी करने वाला दूसरा कोई ना होगा। यह भगवान राम का सबसे बड़ा भक्त होगा। इसका ध्यान करते ही सभी प्रकार के दुख दूर हो जाएंगे। यह मेरे ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से सदा मुक्त होगा। वरदान से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी एवं देवताओं की प्रार्थना सुनकर वायुदेव ने फिर पहले की तरह बहना शुरू कर दिया जिससे तीनों लोकों के प्राणी प्रसन्न हो उठे।

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