विदेशी धरती पर राहुल ने फिर असहिष्णुता, बेरोजगारी का मुद्दा उठाया
By dsp bpl On 19 Sep, 2017 At 02:39 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

वाशिंगटन। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपने विदेश दौरे पर एक बार फिर असहिष्णुता, बेरोजगारी राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास का मुद्दा उठाया है। राहुल गांधी पिछले दो सप्ताह से अमेरिका के दौरे पर हैं| वहां उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति झुकाव रखने वाले थिंक टैंक सेन्टर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस (सीएपी) की ओर से आयोजित भारतीय दक्षिण एशियाई विशेषज्ञों के गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लिया। वहां उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘असहिष्णुता और बेरोजगारी प्रमुख मसले हैं, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं।‘

इस दौरान उन्होंने कई बैठकें भी कीं। बैठक के दौरान राहुल गांधी ने भारत में नौकरियों के अवसर पैदा कर पाने में सरकार के नाकाम रहने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे देश के समने एक खतरनाक स्थिति पैदा हो रही है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष ने वाशिंगटन पोस्ट की संपादकीय टीम से अनौपचारिक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने भारत समेत पूरी दुनिया में असहिष्णुता बढ़ने पर दुख जाहिर किया।

बैठक में शामिल लोगों के अनुसार, व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की दक्षिण एशिया संभाग की प्रमुख लीजा कुर्टिस ने सुबह के नाश्ते के दौरान राहुल के साथ चर्चा की। इस दौरान ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने अमेरिका-भारत संबंधों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल ही में घोषित अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया नीति पर राहुल के विचार पूछे।
माना जा रहा है कि राहुल ने वर्जीनिया के गवर्नर टेरी मैकएलिफ से भी भेंट की है। इन सभी बैठकों में भाग लेने वालों का भी मानना है कि भारत के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण चुनौती रोजगार और असहिष्णुता है। आम तौर पर बैठकों में भाग लेने वाले ज्यादातर लोग राहुल गांधी के ज्ञान, विचारों में स्पष्टता और सच्चाई से प्रभावित थे।

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इन बैठकों में राहुल के साथ वैज्ञानिक और कांग्रेस के विदेश मामलों के अध्यक्ष सैम पित्रोदा मौजूद रहे। सैम पित्रोदा ने कहा, ‘हमें जैसा बताया गया था, वह बिलकुल उसके विपरीत हैं। राहुल तर्कपूर्ण हैं, गंभीरता से विचार करते हैं, मुद्दों को समझते हैं। राहुल गांधी के विरोधियों द्वारा नियुक्त लोग उनकी नकारात्मक छवि बना रहे हैं। राहुल गांधी विकेन्द्रीकरण में विश्वास रखते हैं।‘
उल्लेखनीय है कि राहुल ने अमेरिका की बर्क्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए भी देश के आंतरिक मुद्दों को विदेशी मंच पर उठाया था। जिसको लेकर विरोधी दलों ने उन पर सवाल उठाए थे।

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