बीमारियों के गिरफ्त में फंसती जा रही युवा पीढ़ी
By dsp bpl On 10 Feb, 2017 At 12:53 PM | Categorized As लाइफ स्टाइल | With 0 Comments

युवा पीढ़ी बीमारियों के गिरफ्त में फंसती जा रही है। मोटी सैलरी पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने वाले और मौज-मस्ती के चक्कर में अनियंत्रित जीवन जीने वाले युवा 25 से 45 वर्ष की उम्र में ही बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इसे जीवनशैली का प्रभाव कहें या बढ़ती जिम्मेदारी का बोझ, कारण चाहे जो भी हो पर आजकल के युवा छोटी उम्र में ही बीमारियों की गिरफ्त में आने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा पैसे कमाने, मौज-मस्ती, शराब, नशे, धूम्रपान और जंक फूड पर जमकर पैसे खर्च करने वाली आज की युवा पीढ़ी तेजी से रोगों के चंगुल में फंसती जा रही है।

युवा पीढ़ी फास्ट फूड और जंक फूड की ही दीवानी है। अपनी सेहत को नजरअंदाज करते हुए ये युवा स्वाद के लालच में ऐसा खाना खाते हैं जो इनका कोलेस्ट्रॉल लेवल ही बढ़ाता है। कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना मोटापा और दिल की बीमारी को दावत देना है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो शरीर के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल नसों और दिल में इकट्ठा हो जाता है और दिल के लिए नुकसानदेह बन जाता है। 20 से 30 आयु वर्ग में दिल की बीमारी की आशंकाएं कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं।

नींद में कमी की समस्या आज के युवा वर्ग में एक आम समस्या बन चुकी है, लेकिन लोग शुरुआत में इसे नजरअंदाज करते हैं। बाद में समस्या बढ़ने पर इससे मोटापा, उच्च रक्तचाप जैसी कई अन्य समस्याएं होने लगती हैं। नींद की कमी से होने वाली सबसे आम समस्या स्लीप एपनिया है जिसमें नींद के दौरान सांस में रुकावट पैदा होती है और कई बार यह घातक भी हो सकती है।

आज के युवा छोटी-छोटी बातों को भी दिल में इस तरह बसा लेते हैं कि वे बात तनाव और डिप्रेशन का रूप ले लेती हैं। तनाव दिल के लिए काफी खतरनाक है। इसके कारण मरीज का मिजाज भी बदल जाता है। व्यक्ति छोटी-छोटी बात में चिड़चिड़ाने लगता है, उसके मन में हमेशा बेचैनी बनी रहती है, छोटी-छोटी बात को लेकर भी चिंता करने लगता है जिसके कारण व्यक्ति के मस्तिष्क में स्ट्रेस हमेशा बना रहता है।

बीमारियों के बढ़ने की वजह युवाओं का पश्चिमी लाइफ स्टाइल को बगैर सोचे-समझे अपनाना है। सेहत और सुविधा दोनों के बारे में नजरिया बदला है। फास्ट फूड, कसे हुए कपड़े और वक्त पर खान-पान न करना, इन सभी चीजों ने ऐसी समस्याएं पैदा कर दी हैं जो बहुत ही खतरनाक हैं। ये समस्याएं 15-20 साल पहले नहीं हुआ करती थीं। फास्ट फूड की वजह से मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मामलों में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं आने वाले दिनों में दिल और धमनी की बीमारियों में और तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।

युवाओं पर शीर्ष पर बने रहने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। गांवों में रहने वाली भारत की 72.2प्रतिशत युवा जनसंख्या अच्छे रोजगार के अवसरों की तलाश में लगातार 5,480 शहरों की ओर पलायन कर रही है। हालांकि गांवों से शहरों की ओर जनसंख्या का पलायन कुछ हद तक शहरों को समृद्ध कर रहा है, पर तेजी से बदलती जीवनशैली तन और मन पर भारी दबाव बना रही है, जिसका परिणाम युवाओं पर मधुमेह, हृदयरोगों, अधिक धूम्रपान व एल्कोहल के अधिक सेवन के अलावा तनाव और अवसाद जैसी मानसिक अनियमितता के रूप में देखने को मिल रहा है।

टीनएजर्स में भी हृदय रोग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक अध्ययन से पता चला है कि 14 साल की आयु के प्रत्येक 3 में से एक बच्चे को दिल की बीमारी का जोखिम होता है। टीनएज एक ऐसा समय होता है, जब बच्चा न तो बच्चा ही रह जाता है और न ही पूरी तरह बड़ा हो पाता है। उम्र के दो पड़ावों के बीच झूलते किशोर खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में अक्षम पाते हैं। इससे तनाव काफी बढ़ जाता है। इसका असर उनके दिल पर होता है।

जीवनशैली में लगातार आने वाला परिवर्तन एक ओर जहां दुनिया को तरक्की के नए सोपानों की ओर अग्रसर कर रहा है, वहीं युवाओं को नई-नई तरह की बीमारियों से भी ग्रसित करता जा रहा है। ऐसी एक बीमारी है बीमेट्रिया, जिसे सामान्य भाषा में लोग भूलने की आदत कहते हैं। पहले ये समस्या जहां बुजुर्ग वर्ग के लोगों में ज्यादा देखने को मिलती थी, वहीं युवा लोग भी तेजी से इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। चीजों को रखकर भूल जाना, किसी जरूरी बात का दिमाग से निकल जाना, बातचीत करते समय विषय का ध्यान से हट जाना, नामों का याद न रहना, दिनचर्या में उपयोग में होने वाली छोटी-छोटी बातें भी याद न रहना ये कुछ ऐसी समस्याएं हैं जो तेजी से युवाओं में बढ़ती जा रही हैं। यूं कह लीजिए कि युवा भूलने की समस्या के शिकार होते जा रहे हैं।

खानपान, जीवनशैली, टेक्नालॉजी के अत्यधिक उपयोग और वैश्वीकरण के युग में भारी प्रतिस्पर्धा का दबाव झेल रहे युवाओं की याददाश्त सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। मोबाइल और कंप्यूटर ने युवाओं की याद रखने की ताकत को घटा दिया है। पिछले दिनों एक सर्वे में खुलासा हुआ था कि युवाओं को अपने पांच सहयोगियों के फोन नंबर तक याद नहीं रहते। यही नहीं इंटरनेट के विस्तार ने स्मृति के उपयोग को काफी हद तक सीमित कर दिया है। इसका नतीजा यह है कि कम उम्र में ही उनको भूलने की बीमारी होने लगी है, जबकि यह बीमारी बुजुर्ग होने पर होती है।

– फिटनेस के लिए जरूरी नहीं कि जिम ही जाएं। खासतौर पर सुबह और शाम के समय पैदल चलना भी बेहतरीन व्यायाम है।

– तेज गति से टहलने से हृदय की धड़कनें तेज होती हैं, रक्त संचार नियमित होता है और शरीर में गर्मी पैदा होती है।

-स्वीमिंग और साइक्लींग भी अच्छा विकल्प है। -घर के काम करना, बागवानी, सीढ़ियां चढ़ने के लाभ भी कम नहीं हैं।

-जिम जाते हैं तो थोड़ी देर कार्डियो एक्सरसाइज भी करें।

– नियमित रूप से योगा और ध्यान करना भी तन और मन के लिए अच्छा रहता है। अधिक नहीं कर सकते तो कम से कम योगा में सूर्य नमस्कार करें। यह एक कंप्लीट व्यायाम है, जिससे सभी अंगों का वर्कआउट हो जाता है।

-दिमाग को चुस्त-दुरुस्त रखने का सबसे आसान उपाय है दिमागी कसरत, जो कई तरह दिमागी खेलों जैसे पजल, सुडोकू, क्रॉस वर्ड आदि के माध्यम से की जा सकती है। ये खेल मेमोरी पॉवर को बढ़ाते हैं जिससे जगह, नाम आदि आसानी से याद रखे जा सकते हैं।

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