भोपाल। भोपाल सेन्ट्रल जेल के ब्रेक होने की घटना के बाद प्रदेश की सभी जेलों की सुरक्षा को लेकर जहां रोज सवाल उठा रहे हैं वहीं सुरक्षा खामियों को लेकर नित नए खुलासे हो रहे हैं। घटना के बाद से ही प्रशासन जेलों की सुरक्षा बढ़ाने की मुहिम में जुट गया है लेकिन स्टाफ बढ़ाने की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आलम यह है कि जेलों में लगातार कैदियों की संख्या में इजाफा हो रहा है लेकिन स्टाफ जितना दस साल पहले थ, आज भी उतने ही कर्मियों से जेलों का काम चल रहा है। यह खुलासा जेलों की निगरानी में जुटे अधिकारियों द्वारा किया गया है।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में जिस गति से अपराध बढ़ रहे हैं, जेलों में बंदियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही ह, लेकिन विगत दस वर्षों के दौरान जेल स्टाफ सेंट्रल जेल में बंदियों की संख्या में इजाफा हुआ है लेकिन स्टाफ नहीं बढ़ा है। स्थिति यह भी है कि स्वीकृत स्टाफ भी जेलों में तैनात नहीं है। यहां उदाहरण रीवा सेंट्रल जेल को लेते हैं। यहां 1332 बंदी हैं जिनमें 944 बंदी सजायाफ्ता और 371 बंदी विचाराधीन हैं। इन बंदियों के लिए जेल में स्वीकृत स्टॉफ 150 का है लेकिन तैनाती आधी ही है। यहां की जेल में दो की जगह एक ही जेलर तैनात है और स्टाफ में महज 90 कर्मी तैनात हैं। यही हालात प्रदेश के अन्य जेलों के हैं। ऐसे में जेलों की सुरक्षा को लेकर सवाल तो उठेंगे ही।



