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अनशन पर सरकार की चुप्पी
एजेंसी . नई दिल्ली
समाजसेवी अन्ना हजारे भले ही ऊपरी तौर पर सरकार से बातचीत नहीं करने की बात कह रहे हों पर उनके खेमे में इस बात की टेंशन साफ देखी जा रही है कि अनशन तुड़वाने के लिए सरकारी खेमे में कोई हलचल नहीं है। हालांकि अन्ना हजारे का सम्मान करने वाले सुशील कुमार शिंदे के गृह मंत्री बनने से अन्ना के खेमे को संवाद की कुछ उम्मीद बंधी है। टीम अन्ना ने शिंदे को भी दागी मंत्रियों की सूची में डाल रखा है पर अन्ना ने अभी तक शिंदे के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा है। यही वजह है कि अन्ना और शिंदे के रिश्ते में खिंचाव नहीं आया है। पिछली बार भी केंद्रीय मंत्री शिंदे ने एक धार्मिक संत के जरिए संवाद में थोड़ी मदद की थी। आने वाले दिनों में यह सामने आएगा कि अन्ना और गृह मंत्री शिंदे के रिश्ते कैसे बने रहते हैं क्योंकि सेहत बिगडऩे पर दिल्ली पुलिस को अनशनकारियों के साथ जबरदस्ती करनी पड़ सकती है।

गंभीर हो रही है अरविंद, मनीष, गोपाल की तबीयत
टीम अन्ना के सदस्यों का अनशन आज आठवें दिन में प्रवेश कर गया है। अन्ना हजारे को भी अनशन पर बैठे चार दिन हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि टीम अन्ना के अहम सदस्यों की अनशन के दौरान हालत बिगड़ती जा रही है। शुगर के पेशेंट अरविंद केजरीवाल की बात करें तो उनके शरीर में बेहद कमजोरी देखी जा रही है। हाल यह है कि अरविंद बैठ भी नहीं पा रहे हैं। मनीष सिसोदिया और गोपाल रॉय भी अरविंद के साथ ही अनशन पर बैठे हुए हैं।

टीम अन्ना भ्रष्टाचार के कारण से अंजान: सेन
प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन का मानना है कि अन्ना हजारे और उनकी टीम भ्रष्टाचार के कारणों को नहीं समझती और इससे निपटने का उनका तरीका गलत है। भ्रष्टाचार मिटाने के लिये अनिश्चितकालीन अनशन के तरीके को खारिज करते हुए सेन ने कहा, 'मेरा मानना है कि उन्होंने भ्रष्टाचार या उसके कारण को नहीं समझा है। उसे हटाने के जो तरीके अपनाये हैं, वे गलत हैं। उन्होंने कहा, 'प्रणाली में बदलाव की जरूरत है लेकिन मंत्री को बदलने या धरना देने।.का सवाल नहीं है। यह प्रणाली में बदलाव का सवाल है और भ्रष्टाचार को लेकर व्यवस्था जो प्रोत्साहन देती है, उस पर गौर करने की जरूरत है। एक निजी चैनल को दिये साक्षात्कार में सेन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उत्कृष्ठ अर्थशास्त्री बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि यह सवाल हो सकता है कि वे महान राजनीतिक शख्स हैं या नहीं।आर्थिक वृद्धि के मामले में उन्होंने कहा कि जो वृद्धि से लाभ हुआ है, उसका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा तथा बुनियादी ढांचा में करने की जरूरत है। सेन ने कहा, 'केवल तीव्र आर्थिक वृद्धि की ओर भागना मूखर्ता है।
 
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