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जमुनादेवी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने पीसीसी पहुंचे शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को वाह कहने मजबूर कर दिया। श्री चौहान आज यहां पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. जमुनादेवी को श्रद्घांजलि अर्पित करने पहुंचे थे। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री बसंत साठे और क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नबाव मंसूर अली पटौदी के निधन पर भी मुख्यमंत्री और कांग्रेसजनों ने शोक व्यक्त कर श्रद्घांजलि अर्पित की। स्व. जमुनादेवी की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्घांजलि सभा में कांग्रेस के प्रभारी शांतिलाल पडियार, कैप्टन जयपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष के चित्र पर माल्यार्पण कर मुख्यमंत्री ने कहाकि स्व. जमुनादेवी फूल से कोमल थीं, लेकिन जनहित से जुड़ा कोई भी मामला सामने आने पर वे वज्र सी कठोर हो जाती थीं। गरीब, दलित और समाज के पिछड़े लोगों के लिए उन्होंने पूरे जीवन संघर्ष किया। किसी भी मामले में गड़बड़ी सामने आने पर वे खुलकर मुखर हो जाती थीं। आज भी वे काफी याद आती हैं। वे 1952 से लगातार विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा की सदस्य रहीं, शायद ही कोई नेता इतने लंबे समय तक सदनों में रहा। आज भी उनकी छवि सदन में नजर आती है। वे महान व्यक्तित्व थीं। बड़े और महान व्यक्तित्व किसी पार्टी के नहीं होते। सभी को उनसे प्रेरणा लेना चाहिए। मैं तो यही कहूंगा कि बुआजी यदि हो सके तो फिर लौट के आना। इस मौके पर पूर्व मंत्री एवं गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष रामपाल सिंह, पूर्व मंत्री अखंड प्रताप सिंह, नगर निगम अध्यक्ष कैलाश मिश्रा, प्रमोद गुगालिया, भोपाल जिलाध्यक्ष पीसी शर्मा, अवनीश भार्गव, संजय दुबे, रवि सक्सेना, विकल्प डेरिया, अशोक जैन भाभा, जेपी धनोपिया, जोधाराम गुर्जर, अनिल शर्मा बिट्ïटू आदि मौजूद थे। बिफरे कांग्रेसी: मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आकर पूरी कांग्रेस को आइना देखने को मजबूर कर दिया। अपनी ही नेता को श्रद्घांजलि देने जहां कांग्रेस का कोई बड़ा नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। वहीं कार्यकर्ताओं की संख्या भी ना के बराबर थी। इसके लिए सारा दोष पीसीसी प्रबंधन की बताई जा रही है। पीसीसी ने न तो कार्यक्रम की सूचना किसी को दी और न मुख्यमंत्री के आने की सूचना ही भेजी गई। इसके चलते मुख्यमंत्री के रवाना होते ही पीसीसी में विवाद और असंतोष के स्वर मुखर हो गए। इसके लिए सारी खामी पीसीसी प्रबंधन की बताते हुए नगर निगम अध्यक्ष कैलाश मिश्रा और निजामुद्ïदीन चांद ने कार्यालय प्रभारी शांतिलाल पडियार के सामने अपनी आपत्ति जताई। मीडिया प्रभारी प्रमोद गुगालिया, संगठन प्रभारी कैप्टन जयपाल सिंह को भी नेताओं की नाराजगी से दो-चार होना पड़ा। करीब एक घंटे तक सारे पदाधिकारी और कार्यकर्ता सूचना न मिलने की शिकायत करते रहे।
कृतज्ञ हुई कांग्रेस : एक ओर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यह कहते हुए वाहवाही लूट ली कि महान नेताओं को याद करने में राजनीति और दल आड़े नहीं आना चाहिए। मैं तो पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी और पंडित नेहरू को भी श्रद्घांजलि देने जा चुका हूं। स्व. जमुनादेवी भी महान व्यक्तित्व थीं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इस कदम का स्वागत करते हुए अनुकरणीय बताया। मीडिया प्रभारी श्री गुगालिया ने कहाकि महान नेताओं को श्रद्घासुमन देने में दलगत राजनीति आड़े नही आना चाहिए।
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