बड़वानी। सरदार सरोबर बांध की ऊंचाई बढ़ने से डैम में पानी लबालब भर गया है। इसके चलते बड़वानी और धार जिलों में नर्मदा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को दोपहर के समय बड़वानी जिले के नर्मदा के पुराने पुल पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया था। इसके लिए गांव कुकरा में पुल का आवागमन रोकने के लिये खन्ती खोद गई थी।
यह काम पूरा हुआ ही था कि तभी सोमवार शाम को आपदा प्रबंधन में लगी टीम के मुखिया एसडीएम बड़वानी महेश बड़ोले एवं एनडीआरएफ की टीम कमांडर विजित कुमार वर्मा के मोबाइल पर कलेक्टर तेजस्वी एस नायक का मैसेज आया कि ग्राम जागरवां में नर्मदा नदी का जल एकाएक बढ़ गया है। जिससे नदी किनारे बसे परिवार के कुछ लोग पानी में गिर गये हैं। अत: तत्काल आपदा प्रबंधन की टीम ग्राम में पहुंचकर बचाव कार्य को अंजाम दे।
कलेक्टर के मैसेज प्राप्त होते ही एसडीएम बड़वानी महेश बड़ोले, नर्मदा सेल के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर बीएस कलेश के नेतृत्व में आपदा बचाव की टीम, आठ वाहनों को सड़क मार्ग से तथा एनडीआरफ की तीन टीम मोटर बोट के माध्यम से नदी मार्ग से रवाना हुई और रात में कुकरा से लगभग 15 किलोमीटर दूर बसे जागरवां ग्राम में सड़क से गई टीम 45 मिनट में तथा नदी मार्ग से गई टीम 60 मिनट में पहुंचकर बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया और बाढ़ से घिरे परिवारों को कुशलता से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में सफलता प्राप्त की।
कार्रवाई पूर्ण होते ही जिला मुख्यालय के कन्ट्रोल रूम में बैठे कलेक्टर को मिशन पूर्ण होने का संदेश भेजा गया। जिस पर कलेक्टर ने पूरी टीम को वेल्डन के संदेश के साथ बताया कि यह आपदा प्रबंधन टीम का मॉक ड्रिल था। किन्तु टीम के सभी लोगों ने मिलकर जो कार्य किया है, उसके लिये सभी बधाई के पात्र है।
मॉक ड्रिल के प्रदर्शन के पश्चात कलेक्ट्रेट सभागृह में सोमवार को देर रात हुई बैठक में टीम के प्रत्येक सदस्य ने इस मॉक ड्रिल के दौरान निभाई गई भूमिका एवं उसमें क्या कठिनाई आई, उसे किस प्रकार दूर किया जा सकता है, इसके बारे में भी विस्तार से बताया। बैठक के दौरान सांझा किये गये अनुभव के आधार पर तय किया गया कि आगे होने वाले मॉक ड्रिल के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जायेगा कि पहुंचने में लगने वाले समय को किस प्रकार और कम से कम किया जा सके।



