नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1,000 रुपये के नोट बैन करने के फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर पर खासा असर पड़ने की संभावना है। अनुमान है कि इससे फ्लैट-जमीन की कीमतों में अच्छी गिरावट आएगी जो आम आदमी के लिए राहत की बात है। विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिनों में घर और जमीन की कीमतों में बड़े पैमाने पर गिरावट आ सकती है। 500 और 1,000 रुपये के नोट बैन का सीधा असर रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ेगा।
जमीन-जायदाद की कीमतों में गिरावट की पूरी संभावना हैं। इसकी एक वजह यह है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल किया जाता है। निवेशक अब अपना कैश रियल एस्टेट सेक्टर में नहीं खपा सकेंगे। इसकी वजह से बिल्डरों को प्रॉपर्टी कम कीमत पर बेचनी पड़ेगी। दिल्ली एनसीआर के प्रॉपर्टी मार्केट में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा क्योंकि दिल्ली एनसीआर मार्केट में कैश का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। इस बात में कोई शक नहीं कि सरकार के इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
रियल एस्टेट मामलों के विशेषज्ञ मनीष प्रताप ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि देश अब कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है जो एक परिपक्व अर्थव्यवस्था का संकेत है। यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि काला धन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल जमीन खरीदने में होता है। लेकिन पिछले 6-7 वर्षों में इस सेक्टर में जमीन की खरीद ज्यादा नहीं हुई है। बड़े बिल्डर और रियल एस्टेट कंपनियां कारोबार के लिए पहले से ही बैंक के चैनल का इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसी कंपनियों पर तो इसका खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन छोटे बिल्डरों और सेकेंडरी मार्केट पर इसका असर जरूर पड़ेगा। इसलिए मध्यम और सामान्य वर्ग के खरीदार के लिए अब सस्ते में मकान खरीदना संभव हो पाएगा।



