गुना। शहर की गली-मोहल्लों में लोगों ने अपनी मर्जी से स्पीड ब्रेकर बनवा लिए हैं। इनके क्या नियम हैं और किस तरह से ये बनाए जाना चाहिए, इसकी ओर न तो संबंधित ठेकेदारों ने ध्यान दिया और न ही नियम लागू करवाने वाले अफसरों ने। मनमर्जी के ब्रेकर अक्सर दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। हालात तो यह है कि सीमेंट की सडक़ पर ये दूर से नजर नहीं आते और वाहन चालक अचानक हड़बड़ी में इनका शिकार हो रहे हैं।
दरअसल, शहर में निर्मित सडक़ों पर स्पीड ब्रेकर बनाने में मापदंड का ख्याल नहीं रखा गया। कॉलोनीवासी अपनी इच्छा से ठेकेदार को स्पीड ब्रेकर बनाने का कहते हैं और सभी बातों से अनजान ठेकेदार भी तुरंत अमानक स्पीड ब्रेकर बनाकर रहवासियों को खुश कर देते हैं। नवनिर्मित सडक़ों पर स्पीड ब्रेकर बनाने की एक तरह से होड़ मची हुई है। वहीं कुछ मोहल्लों में तो लोगों ने अपनी सुविधा अनुसार कुछ-कुछ दूरी पर ही स्पीड ब्रेकर बनवा लिए। इसके बाद किसी को यह परवाह नहीं कि अनजान वाहन चालक इनका शिकार होकर गंभीर दुर्घटना का शिकार हो सकता है। कई कॉलोनियों में पूरी सडक़ उखड़ रही है, लेकिन अमानक स्पीड ब्रेकर उन पर शान से खड़े हुए हैं।
यह है ब्रेकर बनाने का नियम
नियम की बात करें तो किसी भी ब्रेकर की ऊंचाई तकरीबन 4 इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। बीच में भी ब्रेकर को सही तरह से स्लोप करना चाहिए। दो ब्रेकरों के बीच करीब 500 मीटर तक की दूरी होनी चाहिए। साथ ही सडक़ के मोड़ पर ब्रेकर का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।
कई बार हादसे का कारण बन चुके ब्रेकर
सडक़ों पर ब्रेकर की समस्या स्थानीय लोगों ने खड़ी की है। कई बार वाहन चालक इन ब्रेकरों को देख नहीं पाते हैं ऐसी स्थिति में उन्हें गिरकर घायल होना पड़ता है। यह समस्या प्रत्येक कॉलोनी में बनी हुई जहां स्कूली बच्चे भी वाहन से निकलते है और अनजाने में इन लापरवाह ब्रेकरों को शिकार हो जाते हैं जो उनके कई दिनों तक पीड़ादायक बन जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी लोग ध्यान दे रहे हैं और न ही इस तरह की समस्या खड़ी करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।



