जबलपुर। विश्वविद्यालय स्तर पर शैक्षणिक गुणवत्ता को निखरने अब इमीनिट्स प्रोफेसर ‘प्रख्यात’ विद्धानों की नियुक्ति होगी। प्रख्यात विद्धानों की नियुक्ति के संबंध में प्रस्ताव 4 नवंबर को प्रस्तावित उच्च शिक्षा विभाग की स्टेडिंग कमेटी में रखा जाएगा। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के बाद उसे कुलाधिपति कार्यालय (राजभवन) भेजा जाएगा।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश पारंपरिक विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक स्तर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर्स को पुन: प्रख्यात विद्धान के तौर पर नियुक्ति दी जाएगी। दरअसल कई विश्वविद्यालयों में आज भी कई ऐसे विषय हैं, जिनके लिए योग्य प्राध्यापकों की खोज चल रही है। वहीं विषय विशेषज्ञ सेवानिवृत्त प्रोफेसर्स अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति अतिथि विद्धान के तौर पर होती है। जिसके तहत उन्हें केवल 25 हजार रुपए मासिक मानदेय देने का प्रावधान है, जो उनकी पूर्व के पद और योग्यता के लिहाज से काफी कम है। जिसको ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय स्तर पर प्रख्यात विद्धान की नियुक्ति करने की मांग उठी थी।
प्रख्यात विद्धानों की नियुक्ति को लेकर 22 अप्रैल को कुलपतियों की सदस्यता वाली एक कमेटी का गठन किया गया था। प्रारंभिक तौर पर जो प्रस्ताव कमेटी द्वारा जो नियुक्ति को लेकर प्रारूप बनाया गया है, उसके तहत विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रख्यात विद्वानों की नियुक्ति अपने स्वयं के संसाधनों से करनी होगी। इसके अलावा भी कई नियमों पर विचार कर प्रारूप तैयार किया गया है। जिसे विचार के लिए 4 नवंबर को स्टेडिंग कमेटी के समक्ष रखा जाएगा।
प्रख्यात विद्धान की नियुक्ति प्रारंभिग चरण में 3 साल के लिए होगी। जिसे कुलपति अधिकत्तम 5 साल के लिए बढ़ा सकेंगे, लेकिन अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष निर्धारित की गई है। इमीनिट्स प्रोफेसर (प्रख्यात विद्धान) की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के तहत होगी। प्रख्यात विद्धानों को एक लाख रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रख्यात विद्धानों की नियुक्ति के लिए बायोडाटा के साथ आवेदन मंगाने होंगे।



