गर्भावस्था में अक्सर लोग सलाह देने लगते हैं कि यह नहीं करना चाहिए, वह नहींकरना चाहिए। प्रियजनों को आपकी और आपके होने वाले बच्चे की फिक्र है, यह बात दिल को सुकून देती है, पर हद तो तब हो जाती है, जब वे लोग भी आपको इस संबंध में मशविरा देने लगते हैं, जिन्हें आप ढंग से जानती तक नहीं। एकाएक यह सोचकर खीझ उठने लगती है कि सभी आपको इस प्रकार सलाह दे रहे हैं मानों आप बीमार हों, पर ऐसा तो नहीं है। गर्भावस्था के दौरान सुबह उठने में आलस्य और थकावट को छोड़ दें तो आमतौर पर आपकी तबियत ठीक ही रहती है।

दरअसल गर्भावस्था के दौरान आपका शरीर छोटी-छोटी बातों से प्रभावित हो सकता है। आपका शरीर गर्भस्थ शिशु के विकास और उसे सुरक्षित रखने में अपनी पूरी ऊर्जा खर्च करने में लग जाता है, इसलिए आपको खुद पर कुछ अधिक ध्यान देना चाहिए। आपको ये बातें तो पहले से पता होंगी ही कि इस दौरान अल्कोलहलका सेवन व धूम्रपान करना नुकसानदायक है, पर इसके साथ ही कुछ अन्य बातों का ख्याल रखना भी जरूरी है।

पेंट से दूरी बेहतर

पेंट में विभिन्न तरल पदार्थ व केमिकल्स होते हैं और आपके शरीर के संपर्क में आने पर वे कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं, यह पूरी तरह से ज्ञात नहीं है। कुछ अध्ययन बताते हैं कि जो महिलाएं ऐसे तरल पदार्थ के संपर्क में ज्यादा रहती हैं, उनके गर्भस्थ शिशु के गैस्ट्रोसाइसिस (आंते दिखाई देना) से पीड़ित होने का खतरा तीन से चार गुना बढ़ जाता है। वैसे होने वाले ब’चे के कमरे को खूबसूरत रंगों से सजाने का यत्न करने पर आपको या गर्भस्थ शिशु को निश्चित रूप किसी प्रकार का नुकसान होगा, इसकी आशंका नहीं रहती है, पर सुरक्षा के लिहाज से बेहतर होगा कि यह काम किसी और को करने दें। आपकी ममता शिशु के प्रति प्यार-दुलार और उसकी फिक्र में झलकती है। अगर वाकई अपने ब’चे का कमरा आप खुद सजाना चाहती हैं तो इसके लिए दूसरे तरीके हैं। उसके कमरे के पर्र्दो और बेडशीट का चुनाव करें। दीवार पर कौन से पोस्टर और तस्वीरें लगानी हैं, इसका चयन करके सजा सकती हैं अपने नन्हें-मुन्ने का कमरा। जब पेंट हो रहा हो तो उस दौरान मास्क लगाकर कमरे में प्रवेश करें। कपड़े भी पूरी बांह के पहनें तो अच्छा रहेगा। वैसे इको पेंट्स भी हैं ऐसी किसी भी समस्या से बचने का बेहतरीन विकल्प।

हाई हील

आप गर्भवती हुईं तो क्या, आकर्षक दिखना आपका अधिकार है। इसमें कहीं कोई संदेह नहीं, पर जब हाई हील चुनें तो थोड़ी सकर्तता बरतना आवश्यक है। पतली हील न सिर्फ आपका पीठ दर्द बढ़ा सकती है, बल्कि कुछ और तकलीफ दे भी सकती है। गर्भावस्था में आपका पेट बढ़ जाता है तो शरीर का सामान्य संतुलन भी प्रभावित होता है। ऐसे में हाई हील पहनने पर आपको चलने में दिक्कत पेश आ सकती है और गिरने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। जिससे गर्भनाल के अपने स्थान से हटने और शिशु का विकास प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान फ्लैट चप्पल या बहुत कम हील पहनना ही बेहतर रहता है।

कीटनाशक से दूरी

अधिकांश कीटनाशकों में डाइथिटोल्यूमाइड मौजूद रहता है, जो त्वचा के जरिए आपकी रक्त वाहिकाओं में पहुंच सकता है। अगर इसकी मात्रा ज्यादा हो गयी तो आपके शिशु के तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। लैब में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि इससे चूजों में जन्म के साथ से ही दोष उत्पन्न होता है, हालांकि इससे खरगोश और चूहों पर किसी प्रकार का असर नहीं देखा गया। अ’छा होगा कि कीटनाशक खरीदते समय लेबल देखकर यह सुनिश्चित कर लें कि उसमें डाइथिटोल्यूमाइड मौजूद न हो। उसके बजाय सिट्रोनेला बेस्ड उत्पाद का इस्तेमाल करें, वह पूरी तरह सुरक्षित है।

सोना बाथ से हो सकता नुकसान

अगर शिशु का अच्छा विकास चाहती हैं तो गर्भावस्था के दौरान सोना बाथ लेने से बचें। सोना बाथ शरीर का तापमान बढ़ा देता है और लगभग 102 फारेनहाइट तापमान पर स्थिर कर देता है, जिससे शिशु के मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी के विकास में गड़बड़ी उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ चुनिंदा मामलों में इससे गर्भपात तक हो सकता है। इसलिए अ’छा होगा कि शरीर की गंदगी हटाने के लिए नियमित रूप से स्क्रब इत्यादि का इस्तेमाल करें।

हेयर डाई से हानि

यह सही है कि हेयर डाई में खतरनाक केमिकल्स होते हैं, पर उससे गंभीर खतरा तभी उत्पन्न होता है, जब आप उसकी अत्यधिक मात्रा के संपर्क में आती हैं। जितनी हेयर डाई आप इस्तेमाल करती हैं, महज उतने में मौजूद केमिकल की मात्रा गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाती, पर गर्भावस्था के प्रथम तीन माह तक उससे दूरी बनाए रखें तो बेहतर होगा। एक बार तीन माह की यह समयावधि बीत गयी तो आपके शिशु को इससे नुकसान पहुंचने का खतरा कम हो जाएगा। हां, इस दौरान आप चाहें तो स्ट्रीक्स हाईलाइट करवा सकती हैं, इसमें खोपड़ी के जरिए केमिकल्स के रक्त में प्रवेश करने का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा चाहें तो केमिकल रहित मेहंदी का इस्तेमाल करें, उसमें भी कोई खतरा नहीं है।

सुशी खाते समय रखें ध्यान

गर्भावस्था के दौरान बगैर पकी मछली को खाने से बचना चाहिए, क्योंकि उसमें परजीवी जैसे टेपवर्म मौजूद होते हैं, जो आपके ब’चे से उसका जरूरी पोषण छीन सकते हैं। वह बैक्टीरिया लिस्टीरिया से भी संक्रमित हो सकती है और यदि आप गर्भवती हैं तो इससे संक्रमित होने की आशंका 20 गुना बढ़ जाती है। हां, अगर मछली की डिश तैयार करने से पहले भली प्रकार डीप फ्रीज किया गया है तो कोई खतरा नहींरह जाता। रेस्त्रां में सुशी खाने से पहले इसके बारे में पूरी पड़ताल कर लें। अगर कुछ गड़बड़ लगे तो बेहतर होगा कि पकाई गई मछली या शाकाहारी व्यंजन ही ऑर्डर करें।

इसेंशियल ऑयल से मसाज

गर्भावस्था के दौरान मालिश कराना अ’छा होता है। चूंकि गर्भावस्था के दौरान शरीर के आकार में बदलाव आता है तो उससे कुछ दर्द व तकलीफ होना समान्य है। मालिश से इस अवस्था में आराम मिलता है। इन दिनों मसाज के लिए इसेंशियल ऑयल की व्यापक रेंज मौजूद है, पर इन पर आंख बंद करके भरोसा करना गलत होगा। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में जब किसी भी तरह का खतरा ज्यादा रहता है, तब आपको ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। ऐसे इसेंशियल ऑयल की लंबी लिस्ट है, जिनके इस्तेमाल से आपको बचना चाहिए। कुछ तेल ऐसे होते हैं, जो गर्भावस्था के बाद के दिनों में गर्भाशय में संकुचन को तेज करते हैं, जिससे समय पूर्व प्रसव पीड़ा का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसलिए इस संबंध में योग्य डॉक्टर से पूर्व परामर्श लेना सुरक्षा के लिहाज से बेहतर होगा।

व्यायाम करें सोच समझकर

गर्भावस्था के दौरान हल्का व्यायाम करना अ’छा रहता है। विशेषज्ञ इसकी सलाह भी देते हैं, पर आपको ऐसे व्यायामों से बचना चाहिए, जिनमें गिरने का खतरा हो।

मूंगफली से एलर्जी

सूखे मेवों से एलर्जी होना सामान्य बात है। अगर आपको, आपके पार्टनर या ब’चों में किसी को विचित्र बुखार, एग्जिमा या अस्थमा की शिकायत है तो आपके शिशु में मेवों से एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए मूंगफली के सेवन से आपको बचना चाहिए।