बयान पर अहीर की सफाई, सिविल सर्जन की गैर-मौजूदगी से नाखुश थे
By dsp bpl On 27 Dec, 2017 At 02:54 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

चंद्रपुर। डॉक्टरों को लेकर अपने बयान से विवाद खड़ा करने वाले केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर ने कहा कि उनका बयान विशेष रूप से सिविल सर्जन के लिए था जिन्होंने सरकारी अस्पताल के समारोह में भाग नहीं लिया। मंत्री ने कहा कि मीडिया ने उनके बयान को गलत तरह से पेश किया। अपने लोकसभा क्षेत्र चंद्रपुर में कल एक समारोह में वरिष्ठ चिकित्सकों की गैर-मौजूदगी से नाराज केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों को नक्सलियों में शामिल हो जाना चाहिए और ‘फिर हम तुम्हें गोली मार देंगे।’ अहीर पूर्वी महाराष्ट्र के चंद्रपुर में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जेनरिक दवा काउंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

समारोह में जिला सिविल सर्जन उदय नवाडे और मेडिकल कॉलेज के डीन एस एस मोरे उपस्थित नहीं थे। मराठी भाषा में अहीर ने कल कहा था, ‘‘नक्सली क्या चाहते हैं? वे लोकतंत्र नहीं चाहते। मैं गृह मंत्रालय का काम देखता हूं, इसलिए मुझे पता है। ये लोग (डॉक्टर) लोकतंत्र नहीं चाहते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए उन्हें नक्सलियों में शामिल हो जाना चाहिए। आप यहां क्यों रुके हैं? वहां जाओ, फिर हम आपको गोली मार देंगे। आप यहां टैबलेट क्यों देते हो? जब मैं अस्पताल आ रहा हूं तो गैर-मौजूद रहना कितना उचित है।’’

अहीर ने कहा कि वह समारोह में सिविल सर्जन की गैर-मौजूदगी से नाखुश थे जिसमें शामिल होने मेयर, उप मेयर जैसे कई गणमान्य और कई वरिष्ठ डॉक्टर आये थे। उन्होंने कहा, ‘‘सिविल सर्जन की गैर-मौजूदगी शर्मनाक रही जिन्हें आगे रहकर नेतृत्व करना चाहिए था।’’ मंत्री ने कहा कि उनका बयान विशेष रूप से सिविल सर्जन के गैरजिम्मेदाराना बर्ताव को लेकर था और अन्य सरकारी अधिकारियों या डॉक्टरों के लिए नहीं था, जैसा कि मीडिया गलत तरह से पेश कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘नक्सली लोकतंत्र नहीं चाहते, यह मुझे पता है कि क्योंकि मैं गृह मंत्रालय में हूं और अगर आप भी लोकतंत्र में भरोसा नहीं रखते तो जाकर नक्सलियों में शामिल हो जाइए। अगर आपको गोली (दवा) देने में दिलचस्पी नहीं है तो हम आपको गोली देंगे। यह मेरा बयान था, जिसे गलत तरह से पेश किया गया और संदर्भ से परे प्रेषित किया गया।’’

अहीर के अनुसार कार्यक्रम का आयोजक होने के बाद सिविल सर्जन की मौजूद नहीं रहना ‘लोकतंत्र के अपमान से कम नहीं है’ और उनका आशय कुछ गोलियां देकर उन्हें अनुशासित करने का था जो सिविल अस्पताल को रोगियों में बांटने के लिए लेनी थीं।

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