दूसरी तिमाही के आर्थिक वृद्धि आंकड़ों से नरमी का दौर समाप्त होने का संकेत: जेटली
By dsp bpl On 12 Dec, 2017 At 01:43 PM | Categorized As व्यापार | With 0 Comments

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि दूसरी तिमाही के आर्थिक वृद्धि के आंकड़े अर्थव्यवस्था में इससे पहले की कुछ तिमाहियों में वृद्धि में आई नरमी के दौर के पलटने का संकेत देते हैं। अर्थशास्त्रियों के साथ बजटपूर्व चर्चा बैठक में जेटली ने कहा कि सरकार वित्तीय मजबूती के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। इस रास्ते में राजकोषीय घाटे को 2015-16 में 3.9 प्रतिशत, 2016-17 में 3.5 प्रतिशत और अब चालू वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद के समक्ष 3.2 प्रतिशत रहने का बजट अनुमान रखा गया है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। अर्थशास्त्रीयों आगामी बजट के लिये कई सुझाव दिये। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाने, विभिन्न प्रकार की रियायतों और छूट को समाप्त करते हुये कार्पोरेट कर की दर को घटाकर 20 प्रतिशत करने, पेंशन और ढांचागत परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिये लंबी अवधि के ‘न्यू इंडिया बॉंड’ जारी करने तथा मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ाने जैसे कई सुझाव दिये। जेटली ने विचार विमर्श के दौरान कहा कि दूसरी तिमाही के वृद्धि आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में कुछ तिमाहियों से जो गिरावट का रुख बना हुआ था उसके पलटने की शुरूआत हुई है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान आर्थिक वृद्धि की दर 5.7 प्रतिशत रही जो कि इससे पहले की तीन साल में सबसे कम थी। दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 6.3 प्रतिशत हो गई। जुलाई में माल एवं सेवाकर लागू होने के बाद इस वृद्धि को कारोबारी समुदाय के नई कर व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाने लेने के तौर पर माना जा रहा है।वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार खर्च को तर्कसंगत बनाने, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिये सार्वजनिक व्यय की खामियों को दूर करने तथा लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली के साथ वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रही है।

बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति के अनुसार यह भी सुझाव दिया गया कि ‘‘सरकार को लगातार राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिये और यदि किसी भी वजह से राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल मुश्किल हो तो उसे स्पष्ट किया जाना चाहिये।’’ अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया कि कर दरों को तर्कसंगत बनाकर और अनुपालन लागत में कमी लाकर कर अनुपालन को बेहतर किया जा सकता है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने और सूक्ष्म, लघु एवं मझोली इकाइयों केलिए प्रोत्साहन बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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