ज्यादातर राज्य सरकारें 24 घंटे बिजली देने पर राजी, लगेंगे प्रीपेड मीटर
By dsp bpl On 8 Dec, 2017 At 01:06 PM | Categorized As व्यापार | With 0 Comments

नयी दिल्ली। केंद्रीय बिजली मंत्री आर. के. सिंह ने कहा कि अधिकतर राज्य हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे बिजली देने के लिए तैयार हो गए हैं। देशभर के बिजली ग्राहकों में 90% को प्रीपेड (पूर्वभुगतान) मीटर और बिजली पर सब्सिडी के नकद लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के तहत लाया जाएगा। सिंह ने कहा, ”हमारा लक्ष्य मार्च 2019 तक सभी को हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे बिजली देने का है। अब यह कानूनी बाध्यता होगी। मार्च 2019 के बाद यदि बिना कारण बिजली कटौती की जाती है तो जुर्माना लगाया जाएगा। केवल तकनीकी दिक्कत और प्राकृतिक आपदा के मामलों को इससे छूट मिलेगी।’’ राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में एक पत्रकार वार्ता के दौरान सिंह ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि सभी सहभागी राज्य लोगों को हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए तैयार हो गए हैं। सिंह ने कहा कि बिजली आपूर्ति के लिए मीटरों को 100% किया जाएगा और इसमें से 90% प्रीपेड मीटर होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ हम मीटर से बिजली की माप, बिल बनाने और शुल्क संग्रहण में मानवीय हस्तक्षेप को पूरी तरह से खत्म करने की ओर बढ़ रहे हैं। बिजली उपभोग के बिल का भुगतान मोबाइल फोन से हो जाएगा। सभी राज्य इसके लिए तैयार हो गए हैं।’’ नब्बे प्रतिशत मीटरों को प्रीपेड मीटर बनाने की समयसीमा के बारे में सिंह ने कहा कि इसके लिए कोई समय सीमा नहीं तय की गई है। लेकिन जनवरी 2019 तक हम बिजली नुकसान को कम कर लेंगे ताकि मार्च 2019 तक हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकें। इस बात पर सहमति हो गई है कि वितरण में नुकसान को जनवरी 2019 तक 15% से नीचे लाया जाएगा।

बिजली मंत्री आर. के. सिंह ने कहा कि बैठक में आड़ी-तिरछी सब्सिडी के मुद्दे पर बातचीत की गई। कुछ राज्यों में शुल्क दरों की 19 स्लैब हैं। बिजली शुल्क दरों को एक विशेषज्ञ समिति की आज पेश की गई रपट के अनुसार ढाला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आड़ी-तिरछी सब्सिडी का अंतर 20% से अधिक नहीं होगा। आड़ी-तिरछी सब्सिडी से आशय न्यूनतम और अधिकतम बिजली शुल्क दर के बीच अंतर से है।शुल्क दर नीति पहले चरण में आड़ी-तिरछी सब्सिडी को 20% तक नीचे लाने में मदद करेगी। इसका फायदा ग्राहकों को एक बड़े तबके को होगा। ग्राहकों को सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के बारे में सिंह ने कहा, ‘‘ किसी भी श्रेणी के ग्राहक को कैसी भी सब्सिडी डीबीटी से दी जाएगी।

यह कानून होगा। सभी राज्य इस पर सहमत हैं।’’ सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य बिजली की दरें नीलामी आमंत्रित किए जाने के बाद तय करेंगे और बिजली खरीद समझौते का पालन करना एक कानून होगा। सौभाग्य योजना के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 तक हम चार करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराएंगे।

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