पीएमएलए मामला: एलआईसी एजेंट चौहान ने जमानत के लिए आवेदन दिया
By dsp bpl On 1 Dec, 2017 At 01:07 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

नयी दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कथित संलिप्तता वाले धन शोधन मामले में आरोपी बनाए गए एलआईसी एजेंट आनंद चौहान ने जमानत के लिए विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया। विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही मान ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को 15 दिसंबर तक चौहान के इस आवेदन पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत इसी दिन मामले की सुनवाई करेगी।

पांच दिसंबर तक अंतरिम जमानत पर रिहा आरोपी चौहान ने कहा है कि उसे नियमित जमानत दी जानी चाहिए क्योंकि जांच के लिए उसकी जरूरत नहीं है और पिछले साल जुलाई में गिरफ्तार होने के बाद से वह पहले ही एक साल जेल में काट चुका है। आरोपी को इससे पहले अदालत ने यह राहत देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस मामले में जमानत देने से मना कर दिया था। उसकी ओर से वकील तरन्नुम चीमा द्वारा दाखिल किए गए हालिया आवेदन में आरोपी ने उच्चतम न्यायालय के उस हालिया फैसले का हवाला दिया है जिसमें न्यायालय ने धन शोधन के मामलों में जमानत लेने की सख्त शर्त को हटा लिया था।

चौहान को पिछले साल नौ जुलाई को धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया था क्योंकि वह जांच अधिकारी के साथ कथित तौर पर सहयोग नहीं कर रहा था। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से मुकदमा लड़ रहे विशेष लोक अभियोजक एनके मट्टा ने अदालत के सामने आरोप लगाया कि चौहान से पूछताछ के दौरान यह पाया गया कि एक एलआईसी एजेंट के तौर पर वह जीवन बीमा की पॉलिसी में निवेश कराकर बेनामी संपत्ति का शोधन करने वाली कार्य प्रणाली से जुड़ा हुआ था।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि वीरभद्र सिंह ने “केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान चौहान के माध्यम से अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने में बहुत अधिक निवेश किया था।” इस मामले में सीबीआई द्वारा एक अन्य मामले में दाखिल आरोपपत्र में चौहान समेत वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी और अन्य के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं। सिंह और अन्य सभी ने ईडी और सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।

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