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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका

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अमृतसर। पद संभालने के बाद पहली बार पंजाब के दौरे पर आए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका। काला सूट पहने राष्ट्रपति कोविंद ने कड़ी सुरक्षा के बीच अपने परिवार के सदस्यों के साथ स्वर्ण मंदिर के पवित्र स्थान पर मत्था टेका। पंजाब के मंत्री राणा गुरजीत सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू ने श्री गुरुरामदास अंतराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर कोविंद की अगवानी की। स्वर्ण मंदिर पहुंचने के बाद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल तथा केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के साथ ही एसजीपीसी अध्यक्ष कृपाल सिंह बादुंगर ने उनका स्वागत किया।

पंजाब के राज्यपाल वी पी सिंह बंदोरे भी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे। स्वर्ण मंदिर में कीर्तन सुनने से पहले एसजीपीसी और पंजाब पुलिस के विशेष कार्यबल के सुरक्षा घेरे में कोविंद ने परिक्रमा की। उन्होंने सरोवर से पवित्र जल भी लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ लंगर भी चखा। स्वर्ण मंदिर परिसर के सूचना केंद्र में राष्ट्रपति ने अतिथि पुस्तिका में अपनी भावनाएं भी व्यक्त की। उन्होंने लिखा, ‘ मैं काफी भाग्यशाली हूं कि मुझे दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) में मत्था टेकने का मौका मिला।’

राष्ट्रपति ने हिंदी में लिखा, ‘ भेदभाव समाप्त करने के लिए सिख धर्म में ‘पंगत, संगत और लंगर’ जैसी समृद्ध परंपरा है और इसका अनुभव आज मुझे मिला। श्रद्धालुओं को यहां सभी व्यक्तियों के कल्याण के लिए काम करते हुए देखकर मुझे अपने देश के मानवीय मूल्यों पर काफी गर्व हो रहा है।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘ मैंने यहां जो दिव्य अनुभव किया वह परमपिता और गुरू नानक देव का आशीर्वाद है।’ कोविंद स्वर्ण मंदिर के सूचना केंद्र भी गए जहां एसजीपीसी अध्यक्ष कृपाल सिंह ने उन्हें एक शॉल, सिख धार्मिक किताबों का एक सेट और स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति देकर सम्मानित किया। बाद में वह ऐतिहासिक जलियांवाला बाग गए। यहां उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुती देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी ।

उन्होंने अमर ज्योति पर भी श्रद्धांजलि दी। जलियांवाला की अतिथि पुस्तिका में उन्होंने लिखा, ‘अमृतसर यात्रा के दौरान मुझे जलियांवाला बाग के उन शहीदों को श्रद्धांजलि देने का मौका मिला, जिन्होंने अपनी जिंदगी देश के लिए कुर्बान कर दी थी।’ उन्होंने लिखा, ‘ इस ऐतिहासिक स्थान पर आने और हमारे शहीदों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए मेरी आंखे नम हो गई है। मैं हृदय से इस माटी के सपूतों के सामने अपना सिर झुकाता हूं।’

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