क्लबफुट मरीजों को उपचार मिले इसका संकल्प होना चाहिए: कोविंद
By dsp bpl On 2 Nov, 2017 At 01:45 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

नयी दिल्ली। रामनाथ कोविंद ने कहा कि यह राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिये कि 2022 तक जन्म से ही अस्थि-विकार से पीड़ित प्रत्येक बच्चे को इस बीमारी का पता चलते ही उपचार मिले। राष्ट्रपति कोविंद ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से सीयूआरई इंडिया की ओर से आयोजित ‘ग्लोबल क्लबफुट काफ्रेंस’ का उद्घाटन करते हुये कहा कि एक अनुमान के मुताबिक देश में प्रति वर्ष करीब 50,000 ऐसे बच्चों का जन्म होता है जो क्लबफुट से पीड़ित होते हैं जिसका उपचार हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हाल तक क्‍लबफुट से ग्रसित बच्‍चों का ऑपरेशन द्वारा इलाज किया जाता था। यह खर्चीला था तथा बच्‍चों और उनके परिजनों के लिए पीडादायक था। ग्रामीण इलाकों में ऑपरेशन की सुविधा मुश्किल थी। इस कारण बहुत से बच्‍चों को इलाज नहीं मिल पाता था। उन्‍हें आजीवन विक्‍लांगता का दंश झेलना पड़ता था।’’ उन्होंने कहा कि क्‍लबफुट के इलाज के लिए एक नई पद्धति ‘पोंसेटि पद्धति’ विकसित की गई है। क्‍लबफुट के इलाज के लिए इसे स्‍वर्ण मानक‍ माना जा रहा है। इसमें ऑपरेशन की आवश्‍यकता नहीं रह जाती है।

पोंसेटि पद्धति में यह अनिवार्य है कि बच्‍चा अपनी बीमारी की पूरी दवा ले। इसके पश्‍चात कई वर्षों तक अपने इलाज की नियमित जांच करवाते रहें। यदि हम सफलता चाहते हैं तो हमें इसे मिशन के रूप में लेना चाहिए। जैसा कि हमने पोलियो और चेचक के मामले में कर दिखाया है।

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