भाजपा नेताओं को अपना कर इतिहास पुनर्लेखन कर रही है: कांग्रेस
By dsp bpl On 1 Nov, 2017 At 01:04 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरदार पटेल जैसे नेताओं को अपना रही है क्योंकि स्वाधीनता संग्राम में उसकी स्वयं की कोई भागीदारी नहीं थी। पार्टी ने भाजपा पर इतिहास पुनर्लेखन का आरोप भी लगाया। विपक्षी दल की यह आलोचना ऐसे समय में सामने आयी जब सरदार पटेल की जयंती को आज सरकार ने काफी जोरशोर से मनाया। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘‘विडंबना देखिए, जो विचारधारा सरदार पटेल को फांसी पर लटकाना चाहती थी, आज राजनीतिक रूप से उनका नाम जप रही है। विचार करिए मोदीजी।’’

आरएसएस पर बरसते हुए सुरजेवाला ने पटेल द्वारा 18 जुलाई 1948 में लिखे एक पत्र का उल्लेख किया और कहा, ‘‘जो लोग बार बार सरदार पटेल की बात करते हैं वे सरदार के उस पत्र के बारे में नहीं बताते जिसमें उन्होंने लिखा था कि क्यों आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।’’ पटेल को गैर कांग्रेसी सरकार के आने तक भारत रत्न नहीं मिलने के भाजपा के आरोपों के बारे में पूछने पर कांग्रेस के प्रवक्ता टाम वडक्कन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कांग्रेस नेता को अपनाने का प्रयास भाजपा द्वारा इस बात का स्पष्ट संकेत एवं स्वीकारोक्ति है कि स्वाधीनता संग्राम में उनकी भागीदारी न केवल गायब थी बल्कि बिल्कुल संदर्भहीन थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे अब कांग्रेस नेताओं को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं और इतिहास पुनर्लेखन की कोशिश कर रहे है।’’ वडक्कन ने कहा कि पुरस्कार दिया या नहीं दिया गया, वह इतिहास है। ‘‘हम जमीनी हकीकत देख रहे हैं।’’ उन्होंने कहा,‘‘सरदार पटेलजी ने क्या किया और उन्होंने किन पर प्रतिबंध लगाया, ये ऐसे मुद्दे हैं जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। सरदार पटेल जी एक कांग्रेसजन थे और वह लोगों के दिल में बसे रहेंगे। उनके लिए पुरस्कारों का कोई महत्व नहीं है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को अपने नेताओं का जश्न मनाने के लिए किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। ‘‘हमारे नेता हैं और वे कांग्रेस के नेता हैं।

इस बारे में कुछ भी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।’’अयोध्या में राममंदिर मुद्दे पर श्री श्री रविशंकर की मध्यस्थता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘श्री श्री सरकार के हितो का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि समझौता संभव है। उन्होंने सवाल किया कि आर्ट आफ लिविंग के प्रमुख जैसे लोगों को इस मामले में किसने नियुक्त किया।

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