एप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाताओं के नियमन की मांग पर गौर करेगी SC
By dsp bpl On 13 Oct, 2017 At 10:00 AM | Categorized As भारत, राजधानी | With 0 Comments

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह ओला और उबर जैसे एप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाताओं के नियमन के अनुरोध वाली याचिका पर गौर करेगा ताकि उन्हें वाहनों के चालकों द्वारा अपराध करने के लिए जवाबदेह बनाया जा सके। शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि ज्यादातर इंटरनेट आधारित टैक्सी प्रदाताओं के मुख्यालय विदेश में स्थित हैं और हाल में स्थानीय कानूनों के क्षेत्राधिकार में आने से इंकार करने पर उबर को लंदन में प्रतिबंधित किया गया है।

न्यायमूर्ति एम बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘इंटरनेट आधारित टैक्सी सेवाओं सहित सार्वजनिक परिवहन के नियमन के मुद्दे पर सात दिसंबर को विचार किया जाएगा।’’ पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब यौन अपराध और तेजाब हमलों की पीड़ित के लिए मुआवजा योजना को लागू करने और महिला सुरक्षा से संबंधित मामले में न्यायमित्र के रूप में अदालत की मदद कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उनके चालकों द्वारा अपराध की कई घटनाएं सामने आई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एप आधारित टैक्सी सेवाएं संचालित करने वाली इन कंपनियों के भारत में मुख्यालय नहीं हैं। कुछ कंपनियों के मुख्यालय नार्वे में हैं जबकि कुछ के अन्य देशों में। उन्हें उनके चालकों द्वारा किये गये अपराध के लिए जवाबदेह ठहराना बहुत मुश्किल है।’’ पीठ ने कहा कि वह सात दिसंबर को याचिका पर सुनवाई करेगी। अदालत ने इंदिरा से सुनवाई की अगली तारीख तक अपने अनुरोध के संबंध में डेटा एवं अन्य जानकारियां देने को कहा।

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