Home भारत रिश्‍वतखोरी मामले में सीमा-शुल्क के पूर्व आयुक्त बरी

रिश्‍वतखोरी मामले में सीमा-शुल्क के पूर्व आयुक्त बरी

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नयी दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने 74.6 करोड़ रुपये के संशयित रिश्वतखोरी मामले में सीमा-शुल्क के पूर्व आयुक्त अतुल दीक्षित और उनके उपायुक्त समेत एक अन्य को बरी कर दिया। अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) सीमा-शुल्क आयुक्त के तौर पर कार्यरत दीक्षित के अलावा अदालत ने तत्कालीन उपायुक्त नलिन कुमार और कारोबारी सहदेव गुप्ता को भी बरी कर दिया। अगस्त 2015 में गिरफ्तार हुए तीनों आरोपी फिलहाल जमानत पर रिहा हैं।

यह मामला कथित धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है जिसमें गुप्ता द्वारा वर्ष 2013-2014 में बढ़ी हुई कीमतों के टैग के साथ हॉन्ग कॉन्ग और दुबई की कंपनियों को आठ हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया गया। आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि अभियोजन पक्ष युक्तिसंगत संदेह के अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ मामले को प्रमाणित करने में सफल नहीं हुआ। आरोप-पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाए थे कि कथित रूप से निर्यात किए गए कपड़ों का बिल बहुत ज्यादा दिखाया गया जिससे की शुल्क वापसी का दावा किया जा सके।

सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच के दौरान राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने कथित तौर पर पाया कि जिन कंपनियों को यह निर्यात करने का दावा किया गया है उन्होंने ऐसा कोई भी ऑर्डर देने से इंकार किया है जबकि गुप्ता ने अपने खाते में आठ हजार करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं। ब्यूरो ने कहा कि अपनी जांच के आधार पर डीआरआई ने 1988 बैच के अधिकारी दीक्षित और कुमार से 300 करोड़ रुपये की सीमा-शुल्क वापसी के दावे को रोकने को कहा जिसे शायद गुप्ता द्वारा दाखिल किया गया था।

सीबीआई ने कहा, “निदेशालय ने आगे आरोप लगाया कि निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के लिए, उक्त सरकारी कर्मचारियों ने जान-बूझकर कंपनियों की सीमा-शुल्क वापसी को तुरंत नहीं रोका और यह सुनिश्चित किया कि कंपनियों द्वारा दावा की गई इस राशि को अपने बैंक खातों में हस्तांतरित किया जा सके।” केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि सरकार को गलत तरीके से करीब 74.61 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई और निजी पार्टियों को फायदा पहुंचा।

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