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SC ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे संबंधी कानून पर केन्द्र से मांगा जवाब

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नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे से संबंधित कानून में हाल ही में किये गये संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर केन्द्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स’ की जनहित याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये बदलाव भारतीय राजनीति में अपारदर्शिता लाएंगे और ‘असीमित राजनैतिक चंदे’ का द्वार खोल देंगे। याचिका के जरिये एनजीओ ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, आयकर अधिनियम और विदेशी चंदा नियमन अधिनियम (एफसीआरए) में वित्त अधिनियम 2016 और 2017 के जरिये किये गए संशोधनों को चुनौती दी गई है। एनजीओ ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इन संशोधनों ने कंपनियों के राजनैतिक चंदे पर से सीमा हटा दी है और चुनाव बांड को शुरू करके अनाम रूप से चंदा देने को वैध बना दिया है, जिसे किसी पार्टी के वित्तपोषण के उद्देश्य के लिये कोई अनुसूचित बैंक जारी कर सकता है।
याचिका में कहा गया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करके चुनावी बांड के जरिये दिये गए चंदे का चुनाव आयोग के समक्ष खुलासा किये जाने से छूट दी गई है और ‘‘यह चुनावी पारदर्शिता को प्रतिकूल तरीके से प्रभावित करेगा और राजनीति में भ्रष्ट आचरण को प्रोत्साहित करेगा।’’ गैर सरकारी संगठन की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कंपनी अधिनियम में संशोधन के जरिये न सिर्फ किसी कंपनी के राजनैतिक चंदे के तौर पर अपने तीन साल के कुल औसत लाभ का साढे़ सात प्रतिशत से अधिक चंदा देने पर लगी पाबंदी हटा दी है, बल्कि अब कंपनी को उन पार्टियों का नाम बताने की आवश्यकता भी नहीं है जिसे वे चंदा देते हैं।

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