शस्त्र पूजा हमारी परंपरा नहीं, संस्कृति है : आरएसएस
By dsp bpl On 30 Sep, 2017 At 12:22 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

गोरखपुर। गोरखपुर उत्तरी स्थित इंपीरियल लाइन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित शस्त्र पूजा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रज्ञा प्रवाह के संगठन मंत्री राम आशीष सिंह ने कहा शस्त्र पूजा हमारी परंपरा नहीं बल्कि संस्कृति है। राम आशीष सिंह ने कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज को एक करने का लक्ष्य होना चाहिए। हिन्दू समाज की विभाजक रेखाओं को खत्म करना होगा। यह स्वीकार करना होगा कि हर एक आत्मा समान है। वही समानता हर व्यक्ति में भी है।

मंत्री ने कहा कि भारत की रीढ़ धर्म है। इसे बचाना है। धर्म की खिलाफत देश और समाज दोनों के लिए घातक है। चाणक्य के समय में भी घुसपैठ जैसी समस्या आई थी। अब बर्मा में है। अगर हम सनातन हिन्दू धर्म की उपेक्षाओं को सहन करते रहे तो समस्या आने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए देश की पहचान और भारतीय संस्कृति को बचाना होगा। मंत्री ने कहा कि यह राष्ट्र हिंदुओं का है, इसकी रक्षा करना हम सबका दायित्व है। सभी भारतीय देवी-देवताओं के हाथों में शस्त्र होता है। शक्ति पूजा हमारी संस्कृति है। इसलिए शक्ति की पूजा होनी चाहिए। हम शांति की स्थापना के लिए शक्ति का अर्जन बंद नहीं कर सकते हैं। कई बार शक्ति ने ही शांति कायम करने का कार्य किया है।

मंत्री ने कहा कि अर्जुन ने भी शस्त्र उठाने से मना किया था। अगर वह शस्त्र नहीं उठाते तो अन्याय की विजय संभव थी। हम भी शास्त्र के साथ शस्त्र पूजन नहीं छोड़ सकते। युद्ध मे प्रणाम करने का संस्कार भी है। योद्धा अपने बाणों से प्रणाम करते थे। अर्जुन ने भी भीष्म पितामह को ऐसे ही प्रणाम किया था। गीता की रचना किसी शोध करने वाले कमरे में बैठकर नहीं हुई है, इसकी रचना युद्ध क्षेत्र में खड़े होकर की गई है। इसकी एक-एक बात प्रयोग सिद्ध है। इस मौके पर उत्तर-प्रदेश बिहार प्रान्त के प्रज्ञा प्रवाह के संगठनमंत्री रामाशीष सिंह के अलावा गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष यशपाल सिंह, सह प्रान्त संघचालक पृथ्वीराज सिंह, राजेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे।

आरएसएस के स्थापना दिवस पर पथ संचलन, शस्त्र पूजा

वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 92वें स्थापना दिवस विजयदशमी पर्व पर शनिवार को अनुशासित स्वयंसेवकों ने दंड सहित गणवेश में कदमताल करते हुए शानदार पथ संचलन किया । पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवकों को पथ संचलन करते देख सड़क के किनारे राहगीरों की भीड़ बरबस ही ठहर जा रही थी। बीच रास्ते में पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवको पर पुष्प भी लोग फेंक कर उनका उत्साह बढ़ाते रहे।

इसके पूर्व संघ के 12 नगर की अगुवाई में अलग-अलग जगहों पर स्वयंसेवक गणवेश में दण्ड के साथ जुटने लगे । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम तथा संघ के संस्थापक प्रथम सरसंघचालक डॉ॰ केशवराव बलिरामराव हेडगेवार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर गुरु जी के चित्र पर माल्यार्पण के बाद भगवाध्वजारोहण शस्त्र पूजा उद्बोधन के बाद संघगीत तत्पश्चात प्रार्थना हुई। इसी क्रम में भारतेन्दु नगर,चेतसिंह नगर में पथ संचलन आयोजित किया गया।

भारतेन्दु नगर की ओर से टाउनहाल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम तथा संघ के संस्थापक प्रथम सरसंघ चालक डॉ॰ केशवराव बलिरामराव हेडगेवार द्वितीय सरसंघ चालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर गुरु जी के चित्र पर माल्यार्पण के बाद संघ चालक भरत ने भगवा ध्वजा रोहण शस्त्र पूजा किया। ध्वजप्रणाम, संघगीत के बाद नगर कार्यवाह भारतेन्दु नगर मान के अगुवाई में पथ संचलन शुरू हुआ। जिसमें उत्साह से भरे संघ के स्वयंसेवक अनुशासित कदमों के साथ सड़कों पर कदम ताल करते हुए उतरे।

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