शारदीय नवरात्र : तीसरे दिन चन्द्रघंटा के दरबार में श्रद्धालुओं की दस्तक
By dsp bpl On 23 Sep, 2017 At 12:20 PM | Categorized As धर्म-अध्यात्म | With 0 Comments

वाराणसी। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को भगवती चंद्रघंटा के दरबार में आधी-रात के बाद से ही आस्था का सैलाब उमड़ता रहा। इस दौरान देवी के जयकारो से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।

कर्णघंटा स्थित दरबार में तड़के ही श्रद्धालु मां के दरबार की ओर चल पड़े। संकरी एवं घुमावदार गलियों में स्थित मां के दरबार में उनका शांतिदायक एवं कल्याणकारी रूप देख निहाल हो गए। माना जाता है कि मां का अलौकिक रूप देख साधक के समस्त पाप-ताप एवं बाधाएं भवानी की कृपा से स्वत: ही दूर हो जाती हैं। प्रेत बाधा आदि से भी मां मुक्ति देती हैं।

इसके पूर्व मंदिर के महंत की अगुवाई में भगवती के विग्रह का पंचामृत स्नान कराया गया। नूतन वस्त्रों से सुशोभित कर अपराजिता, अड़हुल व गेंदा के फूलों से श्रृंगार किया गया। मंगला आरती के बाद रात तीसरे पहर मंदिर का कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोला गया। कपाट खुलते ही प्रांगण जयकारे से गूंज उठा। दर्शन-पूजन के साथ देवी को समर्पित जप व स्तुति के बोल आस्थावानों के मुख से निरंतर फूटता रहा।

मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक एवं कल्याणकारी है। इनके मस्तष्क में घंटे के आकार का अर्धचन्द्र है, इसी कारण मां को चंद्रघंटा कहा जाता है। स्वर्ण की कांतिवाली मां की 10 भुजाएं हैं, इनमें खड्ग, बाण, गदा आदि अस्त्र हैं। मां सिंह पर सवार युद्ध में जाने को उद्यत दिखती हैं। इनके घंटे की भयानक चण्ड ध्वनि से असुर सदैव भयभीत रहते हैं।

तीसरे दिन की पूजा-साधना में साधक का मन-मणिपुर चक्र में प्रवष्टि होता है और तब मां की कृपा से उसे अलौकिक दर्शन होते हैं। साधक के समस्त पाप-ताप एवं बाधाएं भवानी की कृपा से स्वत: ही दूर हो जाती हैं। प्रेत बाधा आदि से भी मां मुक्ति देती हैं। उधर दुर्गाकुंड स्थित कूष्मांडा दरबार में भी भक्तों की लंबी कतार लगी रही। इसके अलावा भदैनी स्थित महिषासुर मर्दिनी देवी, प्राचीन दुर्गा मंदिर, दारानगर में ज्वाला देवी मंदिर, भोजूबीर स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर, अर्दली बाजार के महावीर मंदिर के समीप स्थित दुर्गा मंदिर समेत अन्य देवी मंदिरों में सुबह से लोगों ने दर्शन-पूजन शुरू कर दिया था ।

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