Home राजधानी सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बैन नहीं किया : आरिफ मसूद

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बैन नहीं किया : आरिफ मसूद

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भोपाल। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को एक तरफ जहां मुस्लिम महिलाओं की जीत बताया जा रहा है, वहीं कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। इस मामले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किंग कमेटी के सदस्य आरिफ मसूद का कहना है कि लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले का गलत मतलब निकाल रहे हैं, वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को प्रतिबंधित नहीं किया है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की वर्किंग कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने हिंदुस्थान समाचार से चर्चा में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में तीन तलाक को बैन नहीं किया गया है, बल्कि कई मायनों में यह फैसला पर्सनल लॉ बोर्ड की व्यवस्थाओं को सपोर्ट ही करता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विचार करने के लिए आगामी 10 सितंबर को भोपाल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक होने वाली है, जिसमें इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।

मसूद ने बताया कि यह पहला मौका है जब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किंग कमेटी की बैठक भोपाल में होने जा रही है। इसके लिए तैयारियां चालू हैं। उन्होंने बताया कि मौलाना जफरयाब जिलानी और असद ओवेसी सहित बोर्ड की वर्किंग कमेटी में 50 सदस्य हैं, जिनके इस बैठक में भाग लेने की संभावना है। बैठक के वेन्यू के बारे में फिलहाल फैसला नहीं हो सका है। इसी में तय होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में अब क्या किया जाए। उन्होंने बताया कि बोर्ड की बैठक में फैसले सर्वसम्मति से होते हैं और जो भी बदलाव किए जाते हैं, वे भी सर्वसम्मति से ही किए जाते हैं। मसूद ने बताया कि बैठक के अगले दिन यानी 11 सितंबर को इकबाल मैदान पर औरतों का जलसा होगा, जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना रावेर साहब और जनरल सेक्रेटरी मौलाना वली रहमानी मुस्लिम महिलाओं को बोर्ड के फैसले की जानकारी देंगे।

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे मसूद ने कहा कि यह फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को राहत देने वाला है। इसमें ‘बैन’ शब्द का कहीं पर भी उल्लेख नहीं है। इसके अलावा फैसले में आर्टिकल 25 से छेड़छाड़ न करने की बात कही गई है, जो एक तरह से मुस्लिम पर्सनल लॉ को सपोर्ट करना ही है। उन्होंने कहा कि 300 पेज के इस फैसले को ठीक से पढ़े और समझे बिना कुछ कहना जल्दबाजी है। तीन तलाक पर फैसला पांच जजों की बेंच ने किया है, जिसमें सभी जजों का दृष्टिकोण एक जैसा नहीं है। इनमें से जो कॉमन मुद्दे होंगे, वही कानून की शक्ल ले पाएंगे।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के वर्किंग कमेटी सदस्य आरिफ मसूद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पहले भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सामाजिक सुधारों के लिए प्रयास करता रहा है। बोर्ड ‘इस्लाहे मासरा’ के नाम से कार्यक्रम चलाता है, जिसमें मुस्लिमों को सुधारों के लिए प्रेरित किया जाता है। जहां तक तीन तलाक का सवाल है, तो शरीयत और पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी झटपट तीन तलाक को गलत बताया है, लेकिन इस तथ्य को प्रचारित नहीं किया गया। पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक मॉडल निकाहनामा बनाया है, जिसमें तीन तलाक शामिल नहीं है।

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