लाखों भक्तों ने किए भगवान महाकाल के सात स्वरूपों में दर्शन
By dsp bpl On 22 Aug, 2017 At 01:43 PM | Categorized As मध्यप्रदेश | With 0 Comments

उज्जैन। उज्जयिनी में आनंद भयो जय महाकाल की जयकारे के साथ राजाधिराज भगवान महाकाल की शाही सवारी राजसी ठाट-बाट के साथ सोमवार शाम को अपनी प्रजा को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। भगवान ने सातवीं एवं अंतिम शाही सवारी में सात अलग-अलग रूपों में दर्शन दिए। शाम को चार बजे शुरू हुई शाही सवारी रामघाट पर पूजन-अर्चन के बाद रात 10 बजे वापस महाकाल मंदिर पहुंची और देर भगवान के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ जमी रही। उज्जयिनी में शाही सवारी एवं सोमवती अमावस्या का पर्व एकसाथ होने के कारण दूर-दराज से आए लाखों भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए।

रजतजड़ित पालकी में भगवानचन्द्रमोलेश्वर विराजित थे। पालकी के पीछे हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव की प्रतिमा और नंदी रथ पर उमामहेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट का मुखौटा तथा रथ पर घटाटोप का मुखारविन्द और सप्तधान्य का मुखारविन्द विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए शाही ठाट-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकले। महाकाल मंदिर से जैसे ही पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, वैसे ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के द्वारा सलामी दी गई। पालकी के आगे घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान आदि की टुकडियां मार्च पास्ट करते हुए चल रही थीं। राजाधिराज भगवान महाकाल की सवारी में हजारों भक्त भगवान शिव का गुणगान करते हुए तथा विभिन्न भजन मंडलियां झांझ-मंजीरे, डमरू बजाते हुए चल रहे थे।

सवारी मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु पालकी में विराजित चन्द्रमोलेश्वर के दर्शन के लिए खड़े थे जैसे ही पालकी उनके सामने से निकली वैसे ही पुष्प वर्षा कर श्रद्धालु अपने आप को धन्य मान रहे थे। महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए शाम को साढ़े सात बजे बैण्ड-बाजों, हाथी-घोड़ों एवं कड़ाबीन के धमाके के साथ रामघाट पहुंची। रामघाट पर मां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक-पूजन हुआ। पालकी में भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में विराजित थे। शिप्रा तट पर विधि-विधान से पूजन एवं अर्चन पुरोहितों के दल द्वारा करवाया गया। भगवान महाकालेश्वर की पालकी के दर्शन करने के लिए रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट, रामानुकोट से रामघाट तक हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव से खड़े थे। जैसे ही पालकी घाट पर पहुंची, ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से घाट गुंजायमान हो गया। पुलिस बैण्ड द्वारा मधुर भजनों के धुनों की प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर हो गये। रामघाट पर विश्राम देकर पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर की मूर्ति का पूजन-अर्चन कर पुरोहितों द्वारा आरती की गई।

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