Home राजधानी गरीबों का मजाक उड़ा रही है शिवराज सरकार : अजय सिंह

गरीबों का मजाक उड़ा रही है शिवराज सरकार : अजय सिंह

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भोपाल। सतना जिले के बिरसिंहपुर में भारतीय जनता पार्टी के शांतिभूषण पांडे ने सोमवार को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर भाजपा के जनपद सदस्य और पार्षदों ने भी सदस्यता ली। इस मौके पर एक विशाल आमसभा को संबोधित करते हुए अजय सिंह ने कहा कि गरीबों का मजाक उड़ा रही है शिवराज सरकार।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि जब-जब उपचुनाव आते हैं 25-30 हजार गरीबों के नाम जुड़ जाते हैं और चुनाव होते ही उनके नाम काट दिए जाते हैं। श्री सिंह ने कहा कि मैहर उपचुनाव के समय भी 32 हजार नाम गरीबी रेखा की सूची में जोड़े गए थे उनमें से 30 हजार नाम चुनाव जीतने के बाद काट दिए गए। सामान्य तौर पर अगर कोई गरीब अपना नाम जुड़वाने जाता है तो उससे पैसे लिए जाते हैं।

सिंह ने कहा कि जनता को भ्रमित करने के लिए उप चुनाव होने के पहले मुख्यमंत्री इतनी घोषणा करते है कि उतना सरकार का बजट भी नहीं होता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि मैहर उप-चुनाव के पहले उन्होंने 15 हजार करोड़ की घोषणा की लेकिन अभी तक उनमें से 50 करोड़ के भी काम मैहर विधानसभा में नहीं हुए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करना और गरीबों का अपमान भाजपा सरकार की नियत और नीति दोनों बताती है।

वहीं सिंह ने सतना जिले के ग्राम मझगवां में विगत दिनों अपनी उपज का भुगतान न होने पर आत्महत्या करने वाले किसान स्व. श्री मनोज व्यास के घर पहुंचे और उन्होंने परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने शंकर सहाय व्यास, गुड़िया व्यास, बालक पंकज व्यास एवं पुत्री मानसी व्यास से मुलाकात कर ढांढस बंधाया।

उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसानों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज और हाल ही में मध्यप्रदेश आए भाजपाध्यक्ष अमित शाह भले ही किसानों के नाम पर बेहतरी के आंकडे पेश कर खुद की पीठ थपथपा रहे हैं लेकिन असलियत यह है कि मात्र ढाई माह में 90 किसानों ने प्रदेश में आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जिले में ढाई माह में 13 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

उधर, सिंह ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी प्रश्‍न चिन्‍ह लगाये। कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बेसुध सरकार की वजह से जहाँ रीवा में सरकारी अस्पताल में एक प्रसूता सहित पांच बच्चों की मौत हो गई वहीं टीकमगढ़ में 35 डाक्टरों के त्यागपत्र देने से जिले में सारी व्यवस्था ठप्प हो गई।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज प्रदेश में सरकारी अस्पतालों के हालात क्या है इसका समय-समय पर खुलासा होता रहता है लेकिन रीवा में अस्पताल में हुई 05 बच्चों की मौत सरकार की असंवेदनशीलता बताती है। उन्होंने कहा कि यह मौत शिवराज सरकार पर एक और काला धब्बा है। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। इसलिए अस्पताल आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

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