Home राजधानी प्रदेश के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू-डेंगू से निपटने की पर्याप्त व्यवस्था

प्रदेश के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू-डेंगू से निपटने की पर्याप्त व्यवस्था

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भोपाल। प्रदेश के सभी जिलों में स्वाइन फ्लू और डेंगू से निपटने के लिये आइसोलेशन वार्ड बनाये गये हैं। इसके अलावा प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के अस्पतालों में भी स्वाइन फ्लू उपचार की पर्याप्त व्यवस्था है। यह जानकारी गुरुवार को पिछले महीने से सक्रिय इन वार्डों के क्रिया-कलापों की स्वास्थ्य आयुक्त पल्लवी जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करते हुए दी। इस दौरान विषय-विशेषज्ञ और गांधी मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. लोकेन्द्र दवे और एम्स के माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट डॉ. देवाशीष विश्वास ने सभी जिलों के सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, मेडिकल विशेषज्ञ और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को संक्रामक रोगों के संबंध में भारत सरकार की गाइड-लाइन, स्वाइन फ्लू से बचाव और उपचार आदि पर प्रस्तुतिकरण दिया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के निर्देश पर सभी जिलों को गाइड-लाइन भेज भी दिये गये हैं।

संचालक स्वास्थ्य डॉ. साहू ने बताया कि 300 से अधिक पलंग वाले अस्पतालों में 10 पलंग, 100 से 300 तक में 5 और 50 बिस्तर वाले अस्पतालों में दो पलंग स्वाइन फ्लू मरीजों के लिये आरक्षित हैं। पड़ोसी राज्यों में बढ़ती संख्या के मद्देनजर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के प्रति सभी अस्पतालों को अलर्ट किया जा चुका है। यही कारण है कि प्रभावी रोकथाम के चलते अधिकांश मरीज स्वस्थ हुए हैं। बहुत देर से अस्पताल लाये जाने के कारण मात्र एक मृत्यु हुई है।

जे.पी. अस्पताल में 18 जुलाई से सक्रिय है स्वाइन फ्लू वार्ड

जे.पी. अस्पताल में स्वाइन फ्लू और डेंगू के उपचार के लिये पिछले कुछ सालों से स्थायी तौर पर वार्ड बनाये गये हैं। इस वर्ष यह वार्ड प्रथम तल से भूतल पर स्थानांतरित कर 18 जुलाई से सक्रिय हैं। वेंटीलेटर सहित यहाँ मरीज के उपचार और पैथालॉजी जाँच की पूरी सुविधाएँ हैं। सात पलंग का आइसोलेटेड स्वाइन फ्लू वार्ड और 10 पलंग का डेंगू वार्ड बनाया गया है। वार्ड में नर्सिंग स्टॉफ, दवाई, उपकरण, सक्सन मशीन, वीटीएन किट, पीपीई किट, एन-95 मास्क, प्लेन मास्क, दस्ताने, बी.पी. इन्स्ट्रूमेंट, ओ.टी. गैस फालो मीटर, ई-पेड मॉनीटर, टेमी-फ्लू दवा सहित अन्य आवश्यक दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था है। स्वाइन फ्लू मरीजों के लिये अलग से ओपीडी बनायी गयी है, ताकि सामान्य ओपीडी में आने वाले मरीज इनके सम्पर्क में न आयें। ओपीडी में अब तक 167 मरीजों की जाँच की गयी है। इनमें से सी-केटेगरी के एक संभावित मरीज को 9 अगस्त से आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर विधिवत इलाज किया जा रहा है।

स्वाइन फ्लू से घबराये नहीं, बस सतर्क रहें

डॉ. लोकेन्द्र दवे ने आज जे.पी. अस्पताल के स्वाइन फ्लू वार्ड का मुआयना किया और नर्स एवं स्टॉफ को प्रशिक्षण दिया। डॉ. दवे ने बताया कि स्वाइन फ्लू से भयभीत होने की कतई जरूरत नहीं है। स्वाइन फ्लू के वायरस मरीज से 4 फीट की दूरी तक ही प्रभावी रहते हैं। मरीज को दवा देने के बाद सेनीटाइजर से अच्छी तरह हाथ साफ कर लें। डॉ. दवे ने कहा कि प्लेन मास्क रोग से बचाव के लिये पर्याप्त है। उन्होंने मास्क पहनने का उचित तरीका भी बताया। डॉ. दवे ने कहा कि मास्क फेंकने के दो घंटे बाद कीटाणु स्वत: ही नष्ट हो जाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज भी डेंगू, स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया आदि रोगों की दैनिक समीक्षा की जाकर संबंधित जिलों को दिशा-निर्देश जारी किये गये।

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