Home मध्यप्रदेश डूब प्रभावितों के घर खाली करने की समयसीमा खत्म, अब होगी सख्ती

डूब प्रभावितों के घर खाली करने की समयसीमा खत्म, अब होगी सख्ती

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भोपाल। सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ऩे से प्रदेश के चार जिलों के कई गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर डूब प्रभावितों को अपने आवास खाली करने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया था। अब डेडलाइन समाप्त होने के बाद सरकार के निर्देश पर प्रशासन सख्ती से विस्थापितों को पुनर्वास स्थलों में शिफ्ट करेगा। फिलहाल, शासन की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि प्रभावित मर्जी से जगह खाली कर पुनर्वास स्थलों में चले जाएं। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो फिर सख्ती की जाएगी। उल्लेखनीय है कि सरदार सरोवर से बड़वानी जिले में विस्थापित होने वाले 2392 परिवारों के लिये 39 पुनर्वास केन्द्र एवं 50 अस्थाई पुनर्वास शेड में सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की गयी है।

पुनर्वास केन्द्रों पर बिजली, सड़क़, पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं के अलावा अन्य सुविधाएँ मुहैया करवाई गयी हैं। यहाँ पर 115 हैण्ड-पम्प एवं 81 पॉवर पम्प के माध्यम से पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। आंतरिक सड़क़ों का जाल बिछाया गया है तथा 171 शासकीय भवनों की मरम्मत एवं रंग-रोगन का कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है। डूब क्षेत्र में रहने वाले ऐसे परिवार, जिन्होंने किसी कारणवश पुनर्वास स्थलों पर मकान नहीं बनाये हैं, उनके लिये 50 अस्थाई शेड का निर्माण करवाया गया है, जहाँ 1000 परिवार तात्कालिक रूप से निवास कर सकेंगे।

इसी प्रकार धार की कुक्षी एवं मनावर तहसील के 752 परिवारों ने सरदार सरोवर पैकेज योजना के अंतर्गत वचन-पत्र भरकर 80 हजार रुपये का लाभ लिया है। मनावर तहसील के 392 परिवारों को 3 करोड़ 13 लाख 60 हजार रुपये तथा कुक्षी तहसील के 360 परिवारों को 2 करोड़ 88 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

पुनर्वास स्थलों पर स्वास्थ्य संस्थाओं पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिये 49 सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों में 158 चिकित्सा अधिकारियों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ की ड्यूटी 24 घंटे आगामी आदेश तक लगायी गयी है। नगरीय निकायों के फायर ब्रिगेड को चालक एवं फायर स्टॉफ सहित तत्काल प्रभाव से पुनर्वास केन्द्रों पर मुहैया कराया गया है। साथ ही पेयजल के लिये हैण्ड-पम्प, नल-जल योजना के तहत नल कनेक्शन, निस्तार के लिये नालियाँ, स्ट्रीट लाइट, पशुओं के लिये शेड, चारा एवं भूसा आदि सुविधाएँ मुहैया करवायी जा रही हैं। धार की दोनों तहसील में विद्युत व्यवस्था के लिये 221 ट्रांसफार्मर लगाये जा चुके हैं। शेष कार्य तीव्र गति से किये जा रहे हैं। पुनर्वास स्थलों पर 24 घंटे विद्युत आपूर्ति के लिये ट्रांसफार्मर एवं इलेक्ट्रिक पोल लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

अलीराजपुर और खरगोन जिले के प्रभावित ग्राम शत-प्रतिशत खाली

उल्लेखनीय है कि सरदार सरोवर प्रभावित बड़वानी, धार, अलीराजपुर और खरगोन क्षेत्र से तेजी से विस्थापन जारी है। अलीराजपुर जिले के प्रभावित 26 और खरगोन जिले के प्रभावित 10 ग्रामों से प्रभावित परिवारों का शत-प्रतिशत विस्थापन हो गया है।

यह जानकारी देते हुए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रजनीश वैश ने बताया कि डूब और विस्थापन के बारे में कतिपय तत्वों द्वारा जन-सामान्य को भ्रमित किया जा रहा है। यह बताया जा रहा है कि प्रभावित ग्रामों की संख्या 192 और प्रभावित परिवारों की संख्या 36 हजार है जो पूर्णत: असत्य है। वास्तविकता यह है कि धार, बड़वानी, अलीराजपुर और खरगोन जिले के कुल 178 ग्राम आंशिक डूब के प्रभाव में है। इनमें से धार के 77, बड़वानी के 65, अलीराजपुर के 26 तथा खरगोन के 10 ग्राम है। इन ग्रामों में प्रभावित परिवारों की संख्या 23 हजार 614 है। इनमें से 5551 परिवार गुजरात में बस गए हैं। शेष 18 हजार 63 परिवारों में से 12 हजार 577 परिवार अब तक विस्थापित हो चुके हैं।

वर्तमान में धार जिले के 37 और बड़वानी जिले के 34 गाँवों में 7010 परिवारों का विस्थापन आज की स्थिति में शेष है। श्री वैश ने बताया कि सरदार सरोवर बाँध का भराव निर्धारित विभिन्न चरणों में होगा। ज्ञात हो कि विस्थापित होने वाले प्रत्येक परिवार के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 लाख 80 हजार रुपये का पैकेज स्वीकृत किया है। जिन परिवारों के पास अपने मकान नहीं है, उनके लिए पुनर्वास स्थलों पर अस्थाई मकान की व्यवस्था की गई है। विस्थापन के लिए शेष बचे परिवारों में से 2014 परिवारों के पास पूर्व से ही मकान है। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित पैकेज पर प्रदेश सरकार 900 करोड़ रुपये का व्यय वहन करेगी।

इधर, सरदार सरोबर बांध की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर राजनीति चरम पर है। हर कोई डूब प्रभावितों के हित में आवाज उठाकर अपने को उनका हितैषी बताने में लगा हुआ है। नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी मेधा पाटकर जहां अनशन पर बैठी हैं तो वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी राजनीतिक रोटियां सेंकने में पीछे नहीं हैं। सभी मिलकर डूब प्रभावितों के हक में लड़ाई लड़ऩे की बात कह रहे हैं।

आप के सांसद भगवंत मान मंगलवार को डूब प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए दिल्ली से बड़वानी आ रहे हैं। कांग्रेस के नेता भी बड़वानी के चक्कर काट रहे हैं। डेडलाइन समाप्त होने के बाद डूब प्रभावित भी उग्र हो रहे हैं और उन्होंने आंदोलन की राह पकड़ ली है। सोमवार को उन्होंने कई जगह विशाल प्रदर्शन करते हुए जाम लगाया था। मंगलवार को भी सुबह से ही कई जगह धरना-प्रदर्शन हो रहा है, जबकि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, जहां आगामी आठ अगस्त को सुनवाई होगी। एेसा माना जा रहा है कि तब तक सरकार भी डूब प्रभावितों को हटाने के लिए सख्ती से बचेगी।

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