शिशु के लिए मां का दूध ही है सर्वोत्तम और सम्पूर्ण आहार
By dsp bpl On 31 Jul, 2017 At 05:27 PM | Categorized As मध्यप्रदेश | With 0 Comments

रायसेन। जिले में एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा। स्तनपान के प्रति जनजागरूकता लाने तथा स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने के लिए सोमवार को कलेक्ट्रेट में जिला स्तरीय मीडिया कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें न्यूट्रीशियल इंटरनेशनल के संभागीय समन्वयक बृजमोहन दुबे एवं महिला सशक्तिकरण अधिकारी संजय गहरवाल ने स्तनपान तथा पूरक आहार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कार्यशाला में बताया गया कि 6 माह तक के शिशु के लिए मॉ का दूध ही सर्वोत्तम और सम्पूर्ण आहार माना गया है। इसे ध्यान में रखते हुए स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सरकार एवं अन्य संस्थाओं द्वारा कई अभियान चलाए जा रहे हैं। शिशु को माता के दूध से वंचित रखना उसके शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए घातक है। मीडियाजनों से मॉ के दूध के महत्व को समझाने तथा स्तनपान से संबंधित व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने में सहयोग की अपील की गई। पत्रकारों ने स्तनपान अभियान की सफलता के लिए अनेक सुझाव भी दिए।

स्तनपान क्यों जरूरी
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि मॉ का पहला गाढ़ा दूध बच्चे का पहला प्राकृतिक टीकाकरण है। शीघ्र स्तनपान से मॉ के शरीर से नवजात शिशु को गर्मी मिलती है। प्रसव के बाद तत्काल स्तनपान शुरू करने से गर्भाशय के संकुचन तथा रक्त स्राव रोकने में मदद मिलती है। मॉ व बच्चे को प्रसव के बाद एक साथ रखा जाना चाहिए जिससे स्तनपान जल्दी आरम्भ कराया जा सके।

मॉ के पहले दूध के गुण
शिशु के जन्म के तुरंत बाद और हर हाल में एक घण्टे के अंदर शिशु को मॉं का दूध पिलाया जाना चाहिए। शुरू-शुरू में गाढ़े व पीले दूध को फेंका नहीं जाना चाहिए। मॉं का पहला दूध तत्वों से भरपूर होता है। कॉलेस्ट्रम में संक्रमण के प्रति प्रतिरोध विकसित करने वाले पदार्थ होते हैं। कॉलेस्ट्रम मॉं के शरीर के बाहर असुरक्षित वातावरण के प्रति शिशु में प्रतिरोध विकसित करने में मदद करता है। इसे शिशु का पहला टीकाकरण कहते हैं। इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए दृष्टि, वृद्धि, संक्रमण के प्रतिरोध के लिए अच्छा होता है। साथ ही नवजात शिशु की आहार की सभी जरूरतें कॉलेस्ट्रम से पूरी हो जाती है और ये पचने में हल्का होता है। इसको पीने से बच्चे की पाचन शक्ति बढ़ती है।

कार्यशाला में बताया गया कि पहले 06 माह तक के बच्चे को मॉं के दूध के अलावा कोई भी चीज नहीं देनी चाहिए। क्योंकि घुट्टी, शहद व पानी जैसे अन्य बाहरी पेय पदार्थ देने से शिशु को संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। शिशु में संक्रमण से रक्षा करने वाला तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है। यदि इस समय शिशु को कोई बाहरी पदार्थ दिया जाता है तो वह डायरिया जैसे संक्रमण का आसानी से मुकाबला नहीं कर सकता और बीमार पड़ सकता है। डायरिया के बार-बार होने से शिशु कमजोर हो जाता है, श्वसन तंत्र के संक्रमण निमोनिया और कुपोषण शिकार हो जाता है, इससे शिशु की मृत्यु भी हो सकती है।

मॉं के दूध का कोई विकल्प नहीं
मॉं का दूध बच्चे के लिए पहला टीका है। जो बच्चे को पीलिया, अस्थमा, शरीर ठण्डा पडऩे, डायरिया, एलर्जी आदि से बचाता है। मां का दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है और वृद्धि तेज करता है। स्तनपान करने वाले शिशु का बुद्धि कौशल तीव्र होता है।

स्तनपान कराने वाली माताओं को लाभ
कार्यशाला में बताया गया कि शिशु को स्तनपान कराना मॉ के शरीर को सुडौल बनाने में मदद करता है तथा मॉ के स्वास्थ्य का संरक्षण करता है। गर्भाशय संकुचन में मदद करता है, परिवार नियोजित रखने में मदद करता है तथा गर्भनिरोधक प्रभाव होता है। साथ ही मॉ को अंडाशय और स्तन कैंसर के खतरे से बचाता है। मॉ सहज व बेफ्रिक तथा अधिक प्रसन्न रहती है। मॉ शिशु को तुरंत और सही तापमान का दूध पिला सकती है। पूर्ण स्तनपान कराने वाली माताएं अपने शिशु के पालन-पोषण और उनके व्यवहार के बारे में अधिक तालमेल बिठाने में सक्षम और काबिल हो जाती हैं।

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