कांग्रेस व वाम दलों के बगैर होगी जीसटी की शुरुआत, जेडीयू होगा शामिल
By dsp bpl On 30 Jun, 2017 At 01:09 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

नई दिल्ली। देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव लाने वाले एक समान वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) एक जुलाई से लागू होने के मौके पर शुक्रवार संसद के सेंट्रल हॉल में आधी रात को विशेष साझा सत्र होगा। कांग्रेस, द्रमुक, वाम दल व तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही इसके बहिष्कार का ऐलान कर दिया है लेकिन जेडीयू इस विशेष सत्र में शामिल होगी। हालांकि सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार इस सत्र में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने अपने प्रतिनिधि के तौर पर विजेंद्र यादव उपस्थित रहेंगे। लिहाजा प्रमुख विपक्षी दलों की गैर मौजूदगी में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका आगाज करेंगे। रात 12 बजे घंटा बजाकर इसे लागू किया जाएगा।

इससे पूर्व, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष से अपील की है कि वह बैठक का बहिष्कार न करे। जीएसटी 70 साल में सबसे बड़ा कर सुधार है। जीएसटी के विरोध में शुक्रवार को मध्‍यप्रदेश में बंद रहेगा। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने ऐतिहासिक सत्र में पार्टी सांसदों के भाग नहीं लेने का ऐलान किया। पार्टी के कई नेताओं की राय थी कि जीएसटी मूल रूप से कांग्रेस की देन है, इसलिए उसे इसमें भाग लेना चाहिए, जबकि कुछ नेताओं की राय थी कि सरकार इसे जल्दबाजी में लागू कर रही है, छोटे व्यापारियों व कारोबारियों की परेशानियों का खयाल नहीं रखा गया है, इसलिए उसे सत्र का बहिष्कार करना चाहिए।
हालांकि कांग्रेस के इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने जीएसटी की शुरुआत के लिए संसद में बुलाए गए मध्यरात्रि सत्र का बहिष्कार करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वह अपने इस फैसले पर आज नहीं तो कल पछताएगी। मुझे इसका कारण समझ में नहीं आता, मुझे लगता है कि इसका एकमात्र कारण यह हो सकता है कि देश इस ऐतिहासिक, क्रांतिकारी कराधान सुधार के लिए उन्हें श्रेय नहीं दे रहा है।

नेहरू के भाषण का महत्व कम नहीं करना चाहती है कांग्रेस
सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के स्वतंत्रता के आधी रात को यानी 14 अगस्त 1947 को दिए गए ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ (नियति से किए गए वादे) भाषण के ऐतिहासिक महत्व को कम नहीं करना चाहती, इसलिए वह इस प्रकार के किसी कार्यक्रम में भाग लेने को इच्छुक नहीं है। जीएसटी लॉन्चिंग के मौके पर पीएम मोदी का विशेष भाषण होगा।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे व गुलाम नबी आजाद ने संसद के सेंट्रल हॉल में जीएसटी कार्यक्रम करने पर कड़ा एतराज जताया। खड़गे ने कहा कि संप्रग सरकार ने मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार जैसे कानून बनाए तब किसी का भी जश्न सेंट्रल हॉल में नहीं मनाया गया।

कांग्रेस: आजाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आजाद भारत में आधी रात को केवल तीन जश्न हुए हैं। 1947 में देश की आजादी, 1972 में आजादी की रजत जयंती और 1997 में स्वर्ण जयंती। इन तीनों से भाजपा का नाता नहीं रहा, क्योंकि उसने आजादी के आंदोलन में भाग नहीं लिया था। राजग सरकार सिर्फ प्रचार के लिए जीएसटी की लॉन्चिंग आधी रात को कर रही है।
सिर्फ जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होगा जीएसटी: 16 अप्रत्यक्ष करों के बदले लागू किया जा रहा जीएसटी देश के सभी राज्यों की सरकारें पास कर चुकी हैं। यह सिर्फ जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होगा, क्योंकि इससे संबंधित कानून वहां पारित नहीं हुआ है।
जल्दबाजी में सरकार: येचुरी माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी जीएसटी लागू करने में सरकार द्वारा जल्दबाजी दिखाने का आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए इसका विरोध किया था।

टीएमसी: ममता तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि मोदी सरकार जीएसटी को लागू करने में ‘गैरजरूरी जल्दीबाजी’ दिखा रही है। इसे लागू करने के लिए कम से कम छह महीने चाहिए। हम एक जुलाई से इसे लागू करने को तैयार नहीं हैं।

द्रमुक: द्रमुक प्रवक्ता टीकेएस एलेंगोवन ने कहा कि पार्टी द्वारा विशेष सत्र का बहिष्कार किया जाएगा। इसे ‘फनफेयर’ (जलसा) कार्यक्रम की संज्ञा देते हुए कहा कि यह सिर्फ नई कर प्रणाली लागू करने का समारोह है, जबकि बैंकों व बीमा कंपनियों के राष्ट्रीयकरण व कई अन्य ऐतिहासिक कानूनों को लागू करने के मौके पर ऐसे भव्य कार्यक्रम नहीं किए गए थे। भाकपा: राजा भाकपा नेता डी. राजा ने कहा कि जीएसटी के विरोध में देशभर में आंदोलन का माहौल है, इसलिए वाम दल जश्न में शामिल नहीं होंगे। जीएसटी को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं।

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