राष्ट्रपति ने 26 विद्वानों को हिंदी सेवी सम्मान पुरस्कार से किया सम्मानित
By dsp bpl On 30 May, 2017 At 04:57 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में हिंदी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 26 विद्वानों को वर्ष 2015 के लिए हिंदी सेवी सम्मान पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कृत विद्वानों को प्रशस्ति-पत्र, शॉल और पांच लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई। इस मौके पर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर उपस्थित थे।

राष्ट्रपति ने हिंदी प्रचार-प्रसार एवं हिंदी प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दिये जोन वाला गंगाशरण सिंह पुरस्कार चार लोगों को दिया। इनमें प्रो. एस. शेषारत्नम्, डॉ. एम. गोविन्दराजन, प्रो. हरमहेन्द्र सिंह बेदी और प्रो. एच. सुवदनी देवी शामिल हैँ। हिंदी पत्रकारिता तथा जनसंचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार बल्देव भाई शर्मा और राहुल देव को दिया गया।

विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए आत्माराम पुरस्कार डॉ. गिरीश चन्द्र सक्सैना और डॉ. फणिभूषण दास को दिया गया। सर्जनात्मक एवं आलोचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय के लिए सुब्रहमण्यम भारती पुरस्कार प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित और चंद्रकांता को दिया।

हिंदी माध्यम से ज्ञान के विविध क्षेत्र, पर्यटन एवं पर्यावरण से संबंधित क्षेत्र में मौलिक अनुसंधान के लिए दिया जाने वाला महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन पुरस्कार चित्रा मुद्गल और डॉ. जयप्रकाश कर्दम का दिया गया। विदेशी हिंदी विद्वान को विदेशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं लेखन कार्य के लिए डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार प्रो. फुजिइ ताकेशि (जापान) और प्रो. गब्रिएला निक. इलिएवा (यूएसए) को दिया गया।

अप्रवासी भारतीय विद्वान को विदेशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं लेखन कार्य के लिए पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार डॉ. पुष्पिता अवस्थी (नीदरलैंड) और डॉ. पद्मेश गुप्त (यूके) को दिया गया। कृषि विज्ञान एवं राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल पुरस्कार प्रो. बी.आर. छीपा ओर दयाप्रकाश सिन्हा को दिया गया।

मानविकी के क्षेत्र में एवं कला, संस्कृति एवं विचार की भारतीय चिंतन परंपरा के क्षेत्र में उल्लेखनीय लेखन कार्य के लिए दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार डॉ. महेश चंद्र शर्मा और डॉ. राकेश सिन्हा को दिया गया। भारतविद्या (इंडोलॉजी) के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए स्वामी विवेकानन्द पुरस्कार श्रीधर पराडकर और डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव को दिया गया।

शिक्षाशास्त्र एवं प्रबंधन में हिंदी माध्यम से उल्लेखनीय लेखन कार्य के लिए पंडित मदन मोहन मालवीय पुरस्कार प्रो. नित्यानंद पाण्डेय और जगदीश प्रसाद सिंघल को दिय गया। विधि एवं लोक प्रशासन के क्षेत्र में हिंदी भाषा में उल्लेखनीय लेखन कार्य के लिए राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन पुरस्कार प्रो. शिवदत्त शर्मा और प्रो. अशोक कुमार शर्मा को दिया गया।

इन पुरस्कारों को केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। विद्वानों को हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 12 विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्राप्त हुए। उल्लेखनीय है कि इन पुरस्कारों को केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा 1989 में शुरू किया गया था। विद्वानों को हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 12 विभिन्न श्रेणियों में 26 हिंदी सेवी विद्वानों को प्रति वर्ष सम्मानित करता है।

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