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सहारनपुर हिंसा में वामपंथी दल की भूमिका संदिग्ध: रिपोर्ट

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लखनऊ। सहारनपुर हिंसा में इंटेलिजेंस की आयी रिर्पोट में एक वामपंथी दल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। वामपंथी दल द्वारा भीम सेना को लेकर योजना बनायी गयी और हिंसा कराने के लिए मामूली झगड़े को बढ़ाकर एक बड़ी हिंसा का रूप दिलवाया गया।

बतादें कि इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक टीम सहारनपुर में डेरा डाले हुए है और लगातार चौकसी बरतते हुए रिर्पोट तैयार कर रही थी। इंटेलिजेंस की पहली रिर्पोट में सहारनपुर हिंसा में वामपंथी दल की भूमिका बतायी गयी है। रिर्पोट में स्पष्ट रूप से भीम सेना को वाम दल का समर्थन प्राप्त होना बताया गया है और योजनाबद्ध तरीके से तैयारी कर के बड़ी हिंसा कराने की बात सामने आयी है।

रिर्पोट के अनुसार, भीम सेना को बनाने वाले चन्द्रशेखर के सम्बन्ध कांग्रेस, बसपा और वामपंथी दलों से रहे है। वह भाजपा विरोधी मानसिकता का रहा है। बसपा नेता रविन्द्र मोल्हू से उसका पुराना सम्बन्ध रहा है और सहारनपुर में हुई हिंसा के दौरान उसे दिल्ली तक से धन प्राप्त हुआ है। भीम सेना में जोड़े गये युवकों को पहले फेसबुक और सोशल मीडिया के माध्यम से दलितों पर हो रहे अत्याचार को दिखाया गया है और बाद में सीधे तौर पर एक सेना बनाकर लड़ाई लड़ने की चर्चा की गयी। भीम सेना के निर्माण के बाद से ही छोटे छोटे विवाद को करने का भी प्रयास हुआ है।

रिर्पोट कहती है कि विधानसभा चुनाव में भीम सेना के कार्यकर्ताओं ने वामपंथी दलों का साथ दिया और उनके प्रत्याशियों का प्रचार प्रसार भी किया। चुनाव के बाद सुलग रही चिंगारी ने एक बड़ी हिंसा का रूप ले लिया और भीम सेना का नाम प्रदेश में चर्चा में आ गया।

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