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क्या थी अनिल माधव दवे की अंतिम इच्छा

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ANIL DAVEइंदौर। अपनी सहजता और सादगी के लिये मशहूर रहे केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे की इच्छा थी कि उनकी याद में स्मारक बनाने के बजाय पौधे लगाकर इन्हें बड़ा किया जाये और नदी-तालाबों को बचाया जाये। दवे का दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से आज निधन हो गया। दवे के भतीजे निखिल दवे ने कहा, ‘‘वह (अनिल माधव दवे) हमसे कहते थे कि उनकी मृत्यु के बाद उनका कोई स्मारक न बनाया जाये। अगर कोई व्यक्ति उनकी स्मृति को चिरस्थायी रखना चाहता है, तो वह पौधे लगाकर इन्हें सींचते हुए पेड़ में तब्दील करे और नदी-तालाबों को संरक्षित करे।’’

इस बीच, सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज की प्रति वायरल हो रही है जिसे दवे की कथित आखिरी इच्छा और वसीयत से जुड़ा बताया जा रहा है। इस दस्तावेज पर 23 जुलाई 2012 का दिनांक अंकित है। इस दस्तावेज पर उनका अंतिम संस्कार बांद्राभान में वैदिक रीति से किये जाने, उनकी अंत्येष्टि में किसी तरह का आडम्बर न किये जाने, उनका स्मारक न बनाये जाने, उनकी याद में कोई प्रतियोगिता और पुरस्कार न शुरू किये जाने सरीखी बातों का जिक्र है। दवे के भतीजे निखिल ने कहा कि वह इस दस्तावेज की प्रामाणिकता की पुष्टि तुरंत नहीं कर सकते। लेकिन इस दस्तावेज में कही गयी अधिकतर बातें दिवंगत केंद्रीय मंत्री की पर्यावरणहितैषी सोच और सादगी से भरी रही उनकी जीवन यात्रा से मेल खाती हैं।

अनिल माधव दवे के अचानक निधन के बाद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्ष वर्धन को उनके मौजूदा पद के अतिरिक्त पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा है।

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