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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जस्टिस कर्णन को 6 माह जेल की सजा

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की संवैधानिक पीठ ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन को कोर्ट की अवमानना मामले में 6 महीने कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही मीडिया में जस्टिस कर्णन के बयानों को छापने या प्रसारित करने पर भी पाबंदी लगा दी है। इस पर अमल न करने वाले प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही के दायरे में आएंगे।

जस्टिस कर्णन के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम सात जजों के बेंच ने जस्टिस कर्णन को सर्वसम्मति से अवमानना कार्यवाही दोषी पाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि जस्टिस कर्णन के कोई भी बयान आगे से मीडिया द्वारा न छापे जाएं। देश के इतिहास में पहली बार किसी जज को सजा दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर जस्टिस कर्णन को जेल नहीं भेजा जाएगा तो ये संदेश जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट ने जज द्वारा किए गए अवमानना को माफ कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जस्टिस कर्णन ने खुद को ठीक बताया था और डॉक्टरों की टीम ने भी इसका विरोध नहीं किया है। इसलिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की गई।

उल्लेखनीय है इससे पहले 1 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सभी कोर्ट, कमीशन और ट्रिब्यूनल को आदेश दिया कि आठ फरवरी के बाद जस्टिस कर्णन के द्वारा पारित किसी भी आदेश का संज्ञान नहीं लें। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस कर्णन इस स्थिति में नहीं हैं कि अपना बचाव कर सकें इसलिए उनका मेडिकल परीक्षण कराया जाए। कोलकाता के अस्पताल में उनका मेडिकल परीक्षण पांच मई को कराने का आदेश दिया और सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए पुलिस की एक टीम गठित करने का आदेश दिया।

इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुए। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले 31 मार्च के आदेश को पढ़कर सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन द्वारा पारित आदेश को नोट किया जबकि जस्टिस कर्णन को न्यायिक कार्यों से हटा दिया गया है।

अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि जस्टिस कर्णन के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब तो उन्होंने आठवें जज के खिलाफ भी आदेश जारी कर दिया है। उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था। कोर्ट काम वक्त ऐसे ही बर्बाद नहीं होना चाहिए। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि सभी तरह से उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। रोहतगी ने कहा कि उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने काफी धैर्य का परिचय दिया है। वकील केके वेणुगोपाल ने कहा कि जस्टिस कर्णन द्वारा पारित किए गए दो आदेशों से साफ लगता है कि उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने पूरी चेतना के साथ कोर्ट के आदेश काम उल्लंघन नहीं किया है। कोर्ट ने पूछा कि क्या वे अपना बचाव करने की स्थिति में है तो वेणुगोपाल ने कहा कि नहीं। वे जून में रिटायर हो रहे हैं इसलिए अवमानना के मामले में जेल भेजने काम कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि जस्टिस कर्णन के काउंसलिंग की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि अब दूसरा आदेश देने की जरूरत नहीं है और जून में रिटायर होने से अवमानना याचिका खत्म नहीं हो सकती है।

मुकुल रोहतगी ने कहा कि लोग कोर्ट में इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें जजों पर भरोसा होता है।

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