शिक्षा का अधिकार: गरीब बच्चों के प्रवेश में रुचि नहीं ले रहे निजी स्कूल
By dsp bpl On 6 May, 2017 At 12:21 PM | Categorized As मध्यप्रदेश | With 0 Comments

rteभोपाल, मध्यप्रदेश में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दरअसल, गरीब बच्चों को अच्छे निजी स्कूल में आरटीई के तहत नि:शुल्क प्रवेश मिलता है, ताकि वह अच्छा पढ़-लिखकर सफलता प्राप्त करे, लेकिन एक मई से शुरू हुई इस प्रवेश प्रक्रिया ने अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ी है। इसकी एक वजह यह है कि निजी स्कूल गरीब बच्चों को प्रवेश देने में रुचि नहीं ले रहे हैं।

पांच दिन बीत जाने के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया के तहत निर्देश के बावजूद कई निजी स्कूलों ने सीटों की जानकारी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। इससे कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। गरीब पिछड़े वर्ग के बच्चों के बेहतर पढ़ाई का सपना पूरा करने के मकसद से नि:शुल्क (आरटीई) अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया है।

इसके तहत निजी स्कूलों को प्राथमिक स्तर की कक्षाओं की 25 प्रतिशत सीटें गरीब विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। आरटीई के तहत प्रवेश और फीस वसूली में कई स्थानों पर गड़बड़ी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग इस ओर सावधानी बरत रहा है। इस बार शासन एक-एक निजी स्कूलों की मैपिंग कर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। प्रवेश में पारदर्शिता बरतने के लिए बीते साल से प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है, ताकि निजी स्कूल किसी तरह की गड़बड़ी या मनमानी न कर सकें।

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