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सर्विस टैक्स रिटर्न से हटी जीएसटी रजिट्रेशन की पाबंदी

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भोपाल। जीएसटी के लागू होने से पहले मौजूदा दौर में जमा हो रहे सर्विस टैक्स रिटर्न में कारोबारियों को उलझन में डालने वाला विकल्प हटा दिया गया है। मार्च का सर्विस टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों से जीएसटी आईडी पूछी जा रही थी। रिटर्न के ऑनलाइन फॉर्म के साथ जोड़े इस कॉलम को अब हटा दिया गया है।

रिटर्न दाखिल करने के लिए अब जीएसटी रजिस्ट्रेशन के किसी भी विकल्प पर क्लिक करने की जरूरत नहीं होगी। बीते महीनों से कारोबारियों के जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद व्यापारी को जीएसटी नेटवर्क पर एक प्रोविजनल यूजरनेम दिया जा रहा है। सर्विस टैक्स-एक्साइज के मामले में जीएसटी माइग्रेशन की प्रक्रिया की रफ्तार थोड़ी सुस्त है, ऐसे में कई व्यापारियों को अब तक यूजरनेम नहीं मिल सके हैं। इस बीच मार्च के रिटर्न में जीएसटी यूजरनेम का कॉलम जोड़ दिया गया था। इस नए कॉलम से व्यापारी घबरा गए थे कि बगैर जीएसटी रजिस्ट्रेशन के रिटर्न दाखिल नहीं होगा। इस पर आपत्ति भी ली गई थी कि अभी जीएसटी लागू नहीं हुआ है, ऐसे में रिटर्न में इसका रजिस्ट्रेशन नंबर क्यों लिया जा रहा है।

कर सलाहकारों के मुताबिक सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम द्वारा जारी रिटर्न फाइल के ऑनलाइन आवेदन के पहले पन्ने पर सबसे पहले जीएसटी यूजरनेम मांगा जा रहा था। यह प्रक्रिया विभाग द्वारा जीएसटी माइग्रेशन के डेटा बैंक को वेरिफाई करने का कदम थी। इसके जरिए विभाग पुष्टि कर रहा था कि कौन से व्यापारी माइग्रेशन के बाद जीएसटी की व्यवस्था में रहना चाहते हैं या लिमिट के आधार पर बाहर होना चाहते हैं, क्योंकि कई ऐसे व्यापारियों ने भी अपना माइग्रेशन करवाया है जो जीएसटी की लिमिट में नहीं आते हैं।

पहले की तरह टैक्स-ड्यूटी चुकाने का फॉर्म अपलोड हो चुका है। इसमें अब व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने के लिए किसी तरह के जीएसटी नंबर की जानकारी देने की जरूरत नहीं है। संभवत: व्यापारियों की आपत्ति और रिटर्न दाखिल करने में हो रही परेशानी की शिकायतों के बाद विभाग ने यह संशोधन किया है।

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