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भारत-बांग्लादेश के मध्य तीस्ता समझौता अहम

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The Prime Minister, Shri Narendra Modi and the Prime Minister of Bangladesh, Ms. Sheikh Hasina witnessing the exchange of agreements between India & Bangladesh, in Dhaka, Bangladesh on June 06, 2015.

नई दिल्ली। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय हित के मुद्दों पर बातचीत करेंगी। दोनों नेताओं के बीच वार्ता के दौरान तीस्ता समझौते को लेकर बने गतिरोध के अलावा आतंकवाद से मुकाबला, कट्टरपंथ पर काबू और सुरक्षा सहयोग में वृद्धि जैसे मुद्दों के प्रमुखता से उठने की संभावना है। हसीना के इस दौरे का सबसे अहम मकसद भारत को तीस्ता नदी के पानी पर लंबित समझौते के लिए तैयार करना है। वहीं, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसका विरोध कर रही हैं। ममता बनर्जी शेख हसीना के सम्मान में आयोजित भोज में शामिल होंगी।

उल्लेखनीय है कि सितंबर, 2011 में भी ममता की आपत्ति के बाद अंतिम समय में तीस्ता समझौता नहीं हो पाया था। बांग्लादेश के लिए विशेषकर दिसंबर से लेकर मार्च की अवधि में पानी की कमी के चलते तीस्ता का जल महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इस दौरान जल का प्रवाह अक्सर अस्थायी रूप से 1,000 क्यूसेक से लेकर 5,000 क्यूसेक से भी नीचे तक चला जाता है। तीस्ता समझौता दोनों देशों के लिए एक अहम राजनीतिक आवश्यकता है। इससे भारत को बांग्लादेश में चीन के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी।

बांग्लादेश का 14 फीसदी इलाका सिंचाई के लिए तीस्ता पर निर्भर

तीस्ता समझौता बांग्लादेश की दृिष्ट से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत से होकर चार बड़ी नदियां गुजरती हैं – गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेघना और तीस्ता। यह सिक्किम की पहाड़ियों से निकल कर भारत में लगभग 300 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद बांग्लादेश पहुंचती हैं। वहां इसकी लंबाई 121 किलोमीटर है। तीस्ता इसलिए अहम है कि बांग्लादेश का करीब 14 फीसदी इलाका सिंचाई के लिए इसी नदी के पानी पर निर्भर है। इससे बांग्लादेश की 7.3 फीसदी आबादी को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर रहीं विरोध

दरअसल, उत्तर बंगाल के किसानों की आजीविका तीस्ता नदी के पानी पर निर्भर है। ममता बनर्जी कहती रही हैं कि इसके पानी में कमी से बंगाल के छह जिलों में खेती सीधे तौर पर प्रभावित होगी। किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। 2011 में भी ममता बनर्जी की वजह से तीस्ता पर समझौता होते-होते रह गया था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ढाका गये थे। इससे पहले वर्ष 1983 में तीस्ता के पानी पर बंटवारे पर एक तदर्थ समझौता हुआ था। इसके तहत बांग्लादेश को 36 फीसदी और भारत को 39 फीसदी पानी के इस्तेमाल का हक मिला था। बाकी 25 फीसदी का आवंटन नहीं किया गया।

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