Home मध्यप्रदेश अंतिम दिन सरकारी विभागों में देर रात तक आता रहा पैसा

अंतिम दिन सरकारी विभागों में देर रात तक आता रहा पैसा

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इंदौर। शुक्रवार, 31 मार्च को पिछला वित्तीय वर्ष समाप्त हो गया। सभी सरकारी दफ्तरों में देर रात तक टैक्स जमा होता रहा। खजाने में हजारों करोड़ रुपए आए और दफ्तरों में दिवाली सा माहौल देखा गया। कई विभाग जहां लक्ष्य से आगे निकल गए, वहीं कुछ विभाग लक्ष्य नहीं प्राप्त कर सके। अभी हिसाब किताब करना बाकी है। ऐसे में बताया जा रहा है कि जो विभाग पीछे है, वे भी लक्ष्य पा लेंगे। नगर निगम, वाणिज्यिक कर, आरटीओ, आयकर, आबकारी, पंजीयन सहित तमाम विभागों में देर रात तक केश काउंटर खुले रहे।

सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व इन्दौर जिले से मिलता है। पिछला वित्तीय वर्ष कल समाप्त हो गया। देर रात तक दफ्तरों में टैक्स जमा होता रहा। लोग रात 10 बजे भी कई जगह टैक्स जमा करने पहुंचे। दफ्तरों में हजारों करोड़ रुपए जमा हो गए और अधिकारी कर्मचारी खुशी मनाते रहे। यहां दिवाली जैसा माहौल दिखा। कुछ विभाग तो लक्ष्य से पीछे बताए गए। हालांकि आज और कल में हिसाब किताब हो जाएगा और वास्तविक स्थिति आ जाएगी। बताया गया है कि जो विभाग पीछे हो गए, वे भी लक्ष्य पा लेंगे।

निगम में एक ही दिन में आए 30 करोड़

नगर निगम ने 400 करोड़ का लक्ष्य रखा था। देर रात तक एक ही दिन में  करीब 30 करोड़ रुपए जमा हो गए। राजस्व अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश झोनों पर करदाताओं ने चैक से भी भुगतान किया। चैक की गणना आज होगी और राजस्व का सही आंकड़ा ज्ञात हो सकेगा। सभी 19 झोनों में एआरओ, बिल कलेक्टर और अन्य कर्मचारी राजस्व वसूली में देर रात तक लगे रहे। नगर निगम करदाताओं को अब अग्रिम कर की छूट भी देने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले 8 अप्रैल को लोक अदालत लगेगी, जिसमें सरचार्ज में विशेष छूट दी जाएगी। जो करदाता कल तक पैसा नहीं जमा कर पाए, वे 8 अप्रैल को सरचार्ज का लाभ लेते हुए टैक्स जमा कर सकते हैं।

परिवहन विभाग को मिले 17 करोड़

परिवहन विभाग को सरकार ने 370 करोड़ का लक्ष्य दिया था। जबकि यह लक्ष्य 4 दिन पहले ही कर्मचारियों ने पा लिया था। आरटीओ एमपी सिंह का कहना है कि बी-एस 3 वाहन की बम्पर बिक्री से टैक्स का आंकड़ा बढ़ गया। कल एक दिन में ही करीब 17 करोड़ रुपए खजाने में आए। सभी डीलरों के यहां इन्दौर में हजारों वाहन दिखे। 31 मार्च तक जो वाहन डीलरों के यहां से बिक गए और रसीद कट गई, उसका टैक्स विभाग को मिलेगा। रात 12 बजे तक डीलरों के यहां बीएस 3 वाहनों की खरीदी के लिए भीड़ जमा रही।

वाणिज्यि कर को लक्ष्य से 1 हजार करोड़ अधिक मिले

वाणिज्यिक कर विभाग को 26 हजार करोड़ का टैक्स प्राप्त हुआ। जबकि लक्ष्य 25 हजार करोड़ का था। देर रात तक टैक्स की गणना होती रही। नोटबंदी का असर इस विभाग पर ज्यादा नहीं दिखा। अधिकारी, कर्मचारियों ने लक्ष्य पाने के लिए कड़ी मेहनत की थी। जिसका परिणाम लक्ष्य से एक हजार करोड़ ऊपर राशि मिलने के रूप में मिला।  बड़े बड़े करदाताओं से अधिकारियों ने सीधे संपर्क किया और ऐसा प्रबंधन किया कि बड़ी राशि विभाग को आसानी से मिल गई। गत वर्ष 22 हजार करोड़ का टैक्स विभाग को मिला था।

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