वासंतिक नवरात्र का चतुर्थ दिन मां कूष्माण्डा के मन्दिरों में भक्तों की लगी भीड़
By dsp bpl On 31 Mar, 2017 At 12:46 PM | Categorized As धर्म-अध्यात्म | With 0 Comments

लखनऊ। वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप माता कूष्माण्डा की पूजा होती है। इस बार द्वितीया के क्षय के कारण नवरात्र के तीसरे दिन ही शुक्रवार को मां कूष्माण्डा की पूजा की गई। सुबह से ही मन्दिरों में भक्तों की भीड़ लगी रही है, मां के श्रृंगार के बाद महाआरती के साथ भक्तों के लिए कपाट खोल दिए गए। जिसके बाद लोगों ने लाइन में लग कर बारी-बारी से मां के दर्शन कर घर की सुख समृद्धि की कामना की।

कूष्माण्डा देवी अपनी मन्द मुस्कान से अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण कूष्माण्डा देवी के नाम से जानी जाती हैं। इनकी पूजा के दिन भक्त का मन ‘अनाहत’ चक्र में स्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और शांत मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा करनी चाहिए। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कूम्हड़े को कहा जाता है। कूम्हड़े की बलि इन्हें प्रिय है। इस कारण भी इन्हें कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है।

दुर्गा पूजा के चौथे दिन देवी कूष्माण्डा की पूजा का विधान उसी प्रकार है जिस प्रकार देवी ब्रह्मचारिणी और चन्द्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी देवता की पूजा करें फिर माता के परिवार में शामिल देवी देवता की पूजा करें जो देवी की प्रतिमा के दोनों तरफ विराजमान हैं। इनकी पूजा के पश्चात देवी कूष्माण्डा की पूजा करें। पूजा की विधि शुरू करने से पहले हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर इस मंत्र का ध्यान करें “सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।।”

देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं अतः इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। देवी के हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा है। देवी के आठवें हाथ में बिजरंके (कमल के फूल का बीज) की माला है। यह माला भक्तों को सभी प्रकार की ऋद्धि सिद्धि देने वाली है। देवी अपने प्रिय वाहन सिंह पर सवार हैं। जो भक्त श्रद्धा पूर्वक इस देवी की उपासना दुर्गा पूजा के चौथे दिन (इस बार पांचवें दिन) करता है उसके सभी प्रकार के कष्ट रोग, शोक का अंत होता है और आयु एवं यश की प्राप्ति होती है।

इस देवी का निवास सूर्य मंडल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं।

कूष्मांडा देवी का मंत्र-
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

Leave a comment

XHTML: You can use these tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>