निजी स्कूल नहीं कर रहे सीबीएसई और प्रदेश सरकार के निर्देशों का पालन
By dsp bpl On 31 Mar, 2017 At 12:29 PM | Categorized As मध्यप्रदेश, राजधानी | With 0 Comments

भोपाल। मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों की भरमार है। इन दिनों इनमें शुरुआती कक्षाओं में बच्चों के प्रवेश चल रहे हैं, लेकिन अधिकांश प्राइवेट स्कूल न तो सीबीएसई की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं और न ही मध्यप्रदेश सरकार के नियमों को मान रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर अभिभावकों से मनमानी रकम की वसूली जारी है। शासन के निर्देशों के मुताबिक हर स्कूल की अपनी वेबसाइट होना चाहिए। इस पर स्कूल की समस्त जानकारियां होना अनिवार्य है। वेबसाइट पर शुल्क तथा भुगतान के तरीके एवं एनसीईआरटी के अलावा चलने वाली चार पुस्तकों के प्रकाशन मूल्य तथा लेखक के नाम की सूचना भी सत्र शुरू होने के एक माह पहले डालने के निर्देश हैं। लेकिन इसका खुला उल्लंघन किया जा रहा है। ड्रेस, फीस, स्टेशनरी आदि के संबंध में शासन के नियमों के उलट काम चल रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक के अधिकारी स्कूल संचालकों के सामने बौने साबित हो रहे हैं।

प्राइवेट स्कूल बच्चों को मनमानी किताबें थोपकर लाखों रुपए कमीशन के बतौर डकार लेते हैं। इसी तरह निर्धारित दुकान से यूनिफार्म लेने, जल्द ड्रेस और ब्लेजर बदलने में भी कमीशन का खेल है। ये सभी सामग्री स्कूल से टाइअप दुकान पर ही मिलती है। दरअसल स्कूल क्या ड्रेस, बुक्स रखेगा, इसकी जानकारी पहले से सेट दुकानों को ही दी जाती है। जिससे ये खेल आसान हो जाता है।

मध्य प्रदेश शासन के पत्र क्रमांक एफ 37-7/2015/20-3 दिनांक 30/4/15 में सभी स्कूलों की मान्यताओं और संचालन के लिए कुछ नियम जारी किए गए हैं। इनका पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत एक समिति गठित कर स्कूलों पर छापामारी कार्रवाई करने की मांग की है, जिससे शासन के नियमों एवं उनके मुताबिक स्कूलों में हो रहे पालन का सच सबके सामने आ जाए।

स्कूल पांच वर्ष तक यूनिफार्म नहीं बदलेगा। इसे किसी विशेष दुकान से खरीदने को बाध्य नहीं किया जाएगा। किसी भी शिक्षण सामग्री पर स्कूल का नाम अंकित नहीं होगा। पुस्तक, कॉपियां या अन्य सामग्री किसी दुकान विशेष से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। प्रवेश शुल्क बार-बार नहीं लिया जाएगा तथा प्रवेश फार्म 10 रुपए मूल्य से अधिक का नहीं होगा। प्रवेश शुल्क की राशि एक वर्ष के शिक्षण शुल्क से अधिक नहीं होगी। शाला विकास के नाम पर एक माह के शिक्षण शुल्क से अधिक की राशि वसूल नहीं की जाएगी। केपिटेशन फीस, दान या उपहार नाम से कोई भी फीस वसूल नहीं की जा सकती। शुल्क का भुगतान मासिक या त्रैमासिक किस्तों में होगा। विलंब शुल्क देय राशि के 1 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। फीस वृद्धि निर्धारण संभागीय शुल्क निर्धारण समिति द्वारा ही किया जा सकता है। शुल्क के बारे में अभिभावक आपत्ति ले सकते हैं और इसकी अपील भी होती है।

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