घाट पिपरिया से हुई नर्मदा सेवा यात्रा के 103वें दिन की शुरुआत
By dsp bpl On 31 Mar, 2017 At 01:54 PM | Categorized As मध्यप्रदेश, राजधानी | With 0 Comments

रायसेन। ‘नमामि देवि नर्मदे’-सेवा यात्रा शुक्रवार को सुबह मां नर्मदा की पूजा के बाद रायसेन जिले में बाड़ी विकास खंड के घाट पिपरिया से शुरू हुई। यह यात्रा 103वें दिन यानी शुक्रवार को आगे बढ़ते हुए मांगरोल, कोटपार होकर शुक्रवार शाम को महंत अलीगंज पहुंचेगी। जहां जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लोगों को संबोधित करेंगे।

इससे पहले गुरुवार शाम को नर्मदा सेवा यात्रा ग्राम घाट पिपरिया पहुंची। जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी यात्रा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जन सहभागिता जरूरी है। केवल सरकार अकेले इसे कर लें, यह मुश्किल है इस यात्रा को जनता का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। जनता का सहयोग नर्मदा को प्रदूषण से बचाने, नर्मदा में पानी की धारा लगातार बढ़े, नर्मदा तट पर धने छायादार पेड़ लगाये जाय इस रूप में मिल सकता है। नर्मदा सहित प्रदेश की अन्य नदियों में जल-प्रवाह निरंतर कम हो रहा है। तवा, बेतवा में पानी केवल बरसात के मौसम में ही देखने को मिलता है। जनता से अपील है कि वे नदी सहित अन्य जल-स्त्रोतों को बचायें। वर्षा ऋतु में जल को व्यर्थ न बहने दें। अगर नदीं सरंक्षण के काम में हम समय रहते नहीं चेते तो आने वाली पीढियां हमे माफ नहीं करेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा सेवा कर्म कोड नहीं है बल्कि नदी जल-संरक्षण के प्रति लोगों में चेतना पैदा करने का विनम्र प्रयास है।

सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ पं. जसराज ने कहा कि नदी संरक्षण के लिये मुख्यमंत्री शिवराज चौहान द्वारा समाज को साथ लेकर जो कार्य किया जा रहा है, वह अकल्पनीय है। दुनिया भर में नदियां है जो प्रदूषण का शिकार हो रही है। लेकिन उर्जावन मुख्यमंत्री ने नर्मदा संरक्षण का कार्य किया है, वह विशेष रूप से सराहनीय है। नदियों को प्रदूषण मुक्त करना हम सभी का कर्तव्य है। मैगसेसे पुरूस्कार विजेता प्रसिद्ध पर्यावरण विद् राजेन्द्र सिंह ने कहा कि नीर, नारी, और नदी के खोये हुए सम्मान को पुन: प्रतिष्ठित करने का काम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया है, अन्य प्रदेशों के राजनेताओं को उससे सीख लेनी चाहिये यह अभियान मात्र औपचारिकता नहीं है, बल्कि नदी संरक्षण के महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिये समाज के सभी वर्गो को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।

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