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गुड़ी पड़वा दो दिन, नववर्ष के राजा-मंत्री अलग-अलग

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भोपाल। हिंदू नववर्ष (गुड़ी पड़वा) को लेकर इस बार पंचांगों में मतभेद है। देशभर के ज्यादातर पंचांग (कम्प्यूटराइज्ड) जहां 28 मार्च को तो वहीं कुछ पारंपरिक पंचांग 29 मार्च से हिंदू नववर्ष की शुरुआत बता रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच भी असमंजस की स्थिति है। हालांकि पंडितों का कहना है कि अधिकांश पंचांगों ने 28 मार्च से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत बताई है। ऐसे में इसी दिन मनाना शास्त्र सम्मत है। हालांकि पंचांगों में मतभेद के बीच दो दिन गुड़ी पड़वा का पर्व मनेगा। यदि 28 को हिंदू नववर्ष शुरू हुआ तो वर्ष का राजा मंगल होगा। 29 को शुरुआत मानी गई तो वर्ष का राजा बुध होगा।

ज्यादातर जगहों पर 28 को ही गुड़ी पड़वा मनेगी और इसी दिन से नववर्ष की शुरुआत होगी। पारंपरिक पंचांग को आधार मानने वाले लोग 29 को गुड़ी पड़वा मनाएंगे। उज्जैन में ज्यादातर जगहों पर 29 को गुड़ी पड़वा मनाई जाएगी। घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ पंडितों के अनुसार जिले में 28 मार्च को ही गुड़ी पड़वा ज्यादातर जगहों पर मनाई जाएगी। इस दिन से विक्रम संवत 2074 शुरू होगा। इस दिन दोपहर 12.20 से 12.44 बजे तक अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना करना सर्वश्रेष्ठ है। इसके अलावा सुबह 8.27 बजे के बाद भी श्रेष्ठ मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकती है।

5 अप्रैल को रामनवमी के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन भी होगा। उदयकालीन तिथि प्रतिपदा, इसलिए 29 से नया साल पं. लखन शास्त्री के अनुसार इस बार हिंदू नववर्ष दो दिन मनेगा। पारंपरिक पंचांगों की गणना के अनुसार 29 को सूर्योदय काल में कुछ समय प्रतिपदा तिथि है, ऐसे में इसी दिन से हिंदू नववर्ष शुरू होगा। उन्होंने कहा कम्प्यूटराइज्ड पंचांगों की गणना के अनुसार दोनों दिन सूर्योदय काल में प्रतिपदा तिथि नहीं है इसलिए वे 28 को हिंदू नववर्ष बता रहे है। उन्होंने कहा उज्जैन में ज्यादातर स्थानों पर, काशी में भी 29 को ही गुड़ी पड़वा मनेगी। प्रतिपदा तिथि का क्षय, 28 से ही हिंदू नववर्ष अन्य ज्योितषाचार्यों के अनुसार देशभर के अधिकांश पंचांग 28 मार्च से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत बता रहे हैं। उन्होंने कहा 28 को अमावस्या सुबह 8.26 बजे तक रहेगी। बाद में प्रतिपदा शुरू होगी जो अगले दिन सुबह 5.44 बजे तक रहेगी। प्रतिपदा का क्षय होने से नए वर्ष का आरंभ 28 मार्च मंगलवार को ही होगा। उन्होंने कहा धर्मशास्त्रों का मत है यदि प्रतिपदा तिथि का क्षय हो तो पहले दिन (अमावस्या युक्त प्रतिपदा) में नवरात्र (हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा) का आरंभ श्रेष्ठ और शास्त्र सम्मत है। वर्ष का राजा मंगल और मंत्री गुरु होंगे।

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