Home मध्यप्रदेश प्याज की खेती बनी किसानों के लिए लाभ का धंधा

प्याज की खेती बनी किसानों के लिए लाभ का धंधा

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भिण्ड। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की खेती को फायदे का धंधा बनाने की दिशा में अनुकरणीय पहल की जा रही है। जिसके अन्तर्गत जिले के मेहगांव एवं गोहद क्षेत्र के किसान प्याज की किस्म एग्रीफाउंड डार्क रेड से लाभ उठाने की दिशा में अग्रसर हो रहे है। जिसका अनुशरण क्षेत्र के अन्य किसानों द्वारा किया जाकर खेती को फायदे का धंधा बनाया जा रहा है। इस क्षेत्र के किसानों द्वारा प्याज की पौध, खाद, बीज एवं संचाई की सुविधा प्राप्त कर प्याज की पैदावार से प्रफुलित हो रहे हैं।

जिला प्रशासन की पहल पर कृषि विभाग की आत्मा योजना के अन्तर्गत ग्रामीण अंचलों के किसानों को अपनी खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में मेहगांव क्षेत्र के जेतपुरा निवासी उम्मेदपाल सिंह एवं बाबूसिंह द्वारा आत्मा के अधिकारी श्री गेहलोत से प्राप्त कर अपनी दो-दो बीघा जमीन में प्याज की किस्म एग्रीफाउंड डार्क रेड की बोनी इस वर्ष की गई है। साथ ही विगत वर्ष के किसान बटी निवासी मुकेश सेनी पुत्र रामोतार सेनी द्वारा उनकी दो विस्सा जमीन में इसी किस्म की प्याज की खेती की थी। जिससे वे आर्थिक दिशा की ओर अग्रसर हुए थे। उनका भी अनुशरण इन दो किसानों द्वारा किया गया। जिले के गोहद क्षेत्र के किसान नारायण सिंह निवासी बरथरा द्वारा भी अपनी पांच बीघा भूमि में प्याज की खेती की है। उनके सहयोग से गोहद के निवासी अशोक सिंह गौर एवं विद्याराम नावली द्वारा भी अपने दो-दो बीघा जमीन में प्याज की खेती की है। उनके द्वारा आत्मा के अधिकारियों के बताए अनुसार प्याज की किस्म एग्रीफाउंड डार्क रेड लगाई गई है।

किसानो द्वारा खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में प्याज किस्म की पैदावार से 400 से 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के मान से प्राप्त कर आर्थिक तरक्की की ओर रफ्तार पकडी जा रही है। प्याज की भण्डारण क्षमता को बढाने के भी प्रयास गोहद, गोरमी एवं मेहगांव क्षेत्र में किए जा रहे है। इस प्याज की खेती से अन्य किसान भी लाभ लेने के लिए अपना मन बना रहे है। कलेक्टर डॉ इलैया राजा टी की पहल पर कृषि विभाग के माध्यम से संचालित योजनाओं का लाभ दिलाने की निरंतर पहल की जा रही है। जिसके अन्तर्गत आत्मा योजना के माध्यम से एग्रीफाउंड डार्क रेड किस्म प्याज की खेती का उत्पादन किसान अधिक लेने की दिशा में आगे बढ रहे है। किसानों के द्वारा प्याज की खेती को आवारा पशु भी नहीं खाते है। जिस कारण से फसल दिनोदिन तरक्की की ओर बढकर अधिक उत्पादन देने में सहायक होती है। प्याज की खेती के माध्यम से किसान प्रति हैक्टेयर के उत्पादन से 30 हजार से अधिक राशि प्राप्त करने में सहायक होते है। इसलिए प्याज की खेती के लिए किसानों में रूझान बढ रहा है। साथ ही मार्केट में प्याज की मांग अधिक होने के कारण उसका उपयोग हर परिवार के यहां सब्जियों में किया जाता है।

इसीप्रकार किसी भी नुकसान का अंदेशा नहीं रहता है। जिले के विकास खण्ड मेहगांव क्षेत्र के जेतपुरा निवासी उमेशपाल सिंह एवं बाबूसिंह और गोहद क्षेत्र के नावली निवासी विद्याराम, अशोक सिंह तथा नारायण ने बताया कि आत्मा योजना के अन्तर्गत उप संचालक कृषि भिण्ड डीएस कुशवाह के माध्यम से स्थानीय अधिकारियों द्वारा बताए अनुसार दो से लेकर पांच हैक्टेयर भूमि में एग्रीफाउंड डार्क रेड किस्म की प्याज की खेती से हम आर्थिक तरक्की की ओर अग्रसर हो रहे है। जिसका श्रेय म.प्र. सरकार और जिला प्रशासन को जाता है।

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