अवैध होर्डिंग्स नीति पर अब फैसले का इंतजार
By dsp bpl On 1 Feb, 2017 At 11:54 AM | Categorized As मध्यप्रदेश | With 0 Comments

जबलपुर। अवैध होर्डिंग्स पर लगाम कसने राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में प्रस्तुत ड्राफ्ट रुल्स पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब केवल फैसले का इंतजार रह गया है। साल 2009 से हाईकोर्ट में चल रहे इस मामले के दौरान कई बार होर्डिंग हटाने की कार्रवाई राज्य शासन और प्रशासन द्वारा की गई, लेकिन उसे नियम कायदो के पेंच का भी सामना करना पड़ा।

अब ताजा परिस्थितियों में नई नियमावली क्या तय होती है इस पर जानकारों के साथ प्रभावितों की भी नजर बनी हुई है, ऐसा इसलिए क्योंकि होर्डिंग नीति के अभाव में अब तक फलते फूलते रहे माफिया कारोबारी भी इस ओर टकटकी लगा कर देख रहे हैं।बता दें कि हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर की अध्यक्षता वाली डबल बेंच इस मामले पर राज्य सरकार को कई बार फटकार लगा चुकी है जिसके बाद दिल्ली-मुंबई और तमिलनाडु की होर्डिंग नीतियों के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ड्राफ्ट रुल्स तैयार किया गया जिस पर मूल याचिकाकर्ता सतीश वर्मा द्वारा कुछ बिंदुओं पर ऑब्जेक्शन लिया गया था। इस मामले पर विगत दिनों हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता सतीश वर्मा की ओर से उनकी अधिवक्ता शोभा मेनन द्वारा जस्टिस एके गंगेले और अनुराग श्रीवास्तव की डबल बेंच के समक्ष अपने जोरदार तर्क रखे गए हैं, जहां राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने शासन का पक्ष रखा और होर्डिंग एजेंसी वालों की ओर से उनके अधिवक्ताओं द्वारा अपनी बात रखी गई है।

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