आर्थिक सर्वे: कर संग्रहण बढ़ा, राजस्व व्यय में हुई वृद्धि
By dsp bpl On 31 Jan, 2017 At 05:55 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments

नई दिल्ली। मंगलवार को संसद में प्रस्तुत की आर्थिक समीक्षा में सरकार ने कर संग्रहण को लेकर अपनी उपलब्धि देश के सामने रखी। सरकार ने बताया कि अप्रत्यक्ष करों के संग्रह में अप्रैल–नवम्बर 2016 के दौरान 26.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। केंद्र की वर्तमान सरकार ने बड़े पैमाने पर कर-संग्रहण प्रक्रिया के सरलीकरण को बढ़ावा दिया है। साथ ही पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए कर-संग्रहण में डिजिटलाइजेशन को प्रोत्साहित किया है। आर्थिक सर्वे में सरकार ने माना कि अप्रैल-नवम्बर 2016 के दौरान राजस्व व्यय में खासी वृद्धि हुई है। वित्तमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया है। जिसके केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में हुई बढ़ोतरी से राजस्व व्यय में 23.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

महंगाई पर रहा नियंत्रण

संसद के बजट सत्र के दौरान सदन में रखे आर्थिक सर्वे के माध्यम से सरकार ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में सरकार की महंगाई पर काबू पाने की कोशिशें कामयाब रही। सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति दर चालू वित्त वर्ष के दौरान स्थिर बनी रही है और इसका औसत लगभग 5 प्रतिशत रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी गई मुद्रास्फीति लगातार तीसरे वित्त वर्ष के दौरान नियंत्रण में बनी रही। औसत सीपीआई मुद्रास्फीति दर 2014-15 के 5.9 प्रतिशत से घटकर 2015-16 के दौरान 4.9 प्रतिशत पर आ गई तथा अप्रैल-दिसम्बर 2015 के दौरान 4.8 प्रतिशत पर बनी रही।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति दर 2014-15 के 2.0 प्रतिशत से गिरकर 2015-16 में (-) 2.5 प्रतिशत पर आ गई और अप्रैल-दिसम्बर 2016 के दौरान इसका औसत 2.9 प्रतिशत रहा। मुद्रास्फीति दर में खाद्य वस्तुओं के संकीर्ण समूह से अक्सर बढ़ावा मिलता है और इनमें दालों की खाद्य मुद्रास्फीति में बड़ी भूमिका रही है। लेकिन सरकार ने दाल कारोबार में जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए राज्य सरकारों को कहा, जिसके चलते सरकार ने चालू वित्त वर्ष में लाखों टन दाल जब्त कर बाजार में उतारी। सरकार की सख्ती के चलते दाल कारोबार में जमाखोरी पर अंकुश लगाने में सरकार सफल रही, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ता को दाल के दाम में स्थिरता से मिला। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान दाल कारोबार में जमाखोरी के चलते दाल की खुदरा कीमतों में बड़े पैमाने पर फेरबदल होते देखे गए थे।

कृषि वृध्दि दर में कई गुना वृध्दि

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को शुरू हुए बजट सत्र के पहले दिन सदन में आर्थिक सर्वे को पटल पर रखा। इसमें कृषि क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए वृध्दि दर 4.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। वहीं इस बार रबी का रकबा पिछले साल में 600 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 616 लाख हेक्टेयर आंका गया है। मंगलवार को बजट सत्र के पहले दिन प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में कई गुना वृद्धि की संभावना जताई। पिछले वित्त वर्ष में कृषि वृध्दि दर 1.2 फीसदी रही थी, जो इस बार बढ़कर 4.1 फीसदी रहने का आंकलन किया गया है। वैसे इसके लिए पिछले दो साल से बेहतर मानसून को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। वर्ष 2016-17 के दौरान 13 जनवरी, 2017 को रबी फसलों का कुल बुआई रकबा 616.2 लाख हेक्टेयर आंका गया, जो पिछले वर्ष के समान सप्ताह में दर्ज किये गये रकबे के मुकाबले 5.9 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2016-17 के दौरान 13 जनवरी 2017 को गेहूं का बुआई रकबा पिछले वर्ष के समान सप्ताह में दर्ज किये गये रकबे की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक रहा। इसी तरह वर्ष 2016-17 के दौरान 13 जनवरी 2017 को चने का बुआई रकबा पिछले वर्ष के समान सप्ताह में आंके गए रकबे के मुकाबले 10.6 प्रतिशत ज्यादा रहा।

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