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कलमाड़ी और चौटाला को आजीवन अध्यक्ष बनाने का फैसला वापस

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नई दिल्ली। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला को आयोग का आजीवन अध्यक्ष बनाने का फैसला वापस ले लिया है। आईओए के अध्यक्ष एन.रामचंद्रन ने कहा कि अभय चौटाला और सुरेश कलमाड़ी को आजीवन अध्यक्ष के रूप में ना चुने जाने का फैसला चेन्नई के वार्षिक आम बैठक में लिया गया है। हालांकि कलमाड़ी ने आयोग के इस पद को स्वीकारने से खुद ही इनकार कर दिया था।

उन्होंने कहा था कि जब तक इस आरोप से मैं मुक्त नहीं हो जाता, मैं इस पद को स्वीकार नहीं कर सकता। कलमाड़ी 1996 से 2011 तक आईओए के अध्यक्ष रहे हैं। उन्हें 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में घोटाले में संलिप्तता के कारण दस महीने जेल की सजा काटनी पड़ी थी। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। अभय चौटाला भी दिसम्बर 2012 से फरवरी 2014 तक आईओए अध्यक्ष रहे हैं। उस समय अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने चुनावों में आईओए को निलंबित कर दिया था क्योंकि उसने चुनावों में ऐसे उम्मीदवार उतारे थे जिनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल थे। आईओए अध्यक्ष के रूप में उनके चुनाव को आईओसी ने रद्द कर दिया था। आईओए संविधान में संशोधन के बाद ही आईओसी ने फरवरी 2014 में निलंबन हटाया था।

बता दें कि खेल मंत्रालय ने दागी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को भारतीय ओलंपिक संघ का आजीवन अध्यक्ष बनाने पर कड़ी कार्रवाई करते हुए इन दोनों की नियुक्ति का फैसला वापस लेने तक इस राष्ट्रीय ओलंपिक संस्था को निलंबित कर दिया था। सरकार ने यह कड़ा फैसला आईओए द्वारा कारण बताओ नोटिस की समयसीमा तक ठोस जवाब देने में नाकाम रहने के बाद किया था। आईओए ने अपने अध्यक्ष एन रामचंद्रन के देश से बाहर होने के कारण जवाब देने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि निलंबन के दौरान आईओए राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (एनओसी) के तौर पर सरकार से मिले विशेषाधिकारों का उपयोग नहीं कर पाएगा। इसके साथ ही आईओए को मिलने वाली सभी तरह की वित्तीय या अन्य तरह की सरकारी मदद भी रोक दी जाएगी। मंत्रालय ने इस संबंध में बयान भी जारी किया था। मंत्रालय ने कहा कि सरकार आईओए के जवाब से संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसने विशेषकर सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला की अयोग्यता के संबंध कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सरकार का मानना है कि आईओए का जवाब केवल समय आगे बढ़ाने की चाल है।’ गौरतलब है कि इन दोनों की नियुक्ति पर आईओए के अंदर भी विरोध के स्वर उभरने लगे थे। हॉकी इंडिया के पूर्व प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के नवनियुक्त अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने विरोध स्वरूप आईओए के संबद्ध अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

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