Home मध्यप्रदेश काम विधानसभा प्रभारी का और पुरस्कार लेंगे बीएलओ

काम विधानसभा प्रभारी का और पुरस्कार लेंगे बीएलओ

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भोपाल/इंदौर। निर्वाचन कार्यालय में लापरवाही करने वालों को नोटिस देने के साथ ही पुरस्कार देने की परंपरा भी चल रही है। काम कोई और करे व पुरस्कार बगैर काम करे ही बीएलओ को बांटे जा रहे हैं। अंधा बांटे रेवड़ी, अपनों -अपनों को दे की तर्ज पर ही यहां पुरस्कार की बंदर बांट चल रही है। नाम जोडऩे के आवेदन एकल खिडक़ी पर विधानसभा कक्ष के कर्मचारी जमा कर रहे हैं और संख्या बीएलओ के खाते में दर्ज हो रही है। नामावली के पुनरीक्षण व अभियान के दौरान निर्वाचन कार्यालय बीएलओ के उपस्थित न होने पर नोटिस जारी करता रहता है और बाद में उनमें से ही कुछ को पुरस्कार देकर पुरस्कृत करता आ रहा है।

मतदाता दिवस पर दिए जाने वाले पुरस्कार के समय कोई भी यह देखने वाला नहीं है कि उक्त बीएलओ केंद्र पर कितने दिन उपस्थित हुआ। पुरस्कार देने के लिए यह काफी है कि उसके बूथ पर कितने मतदाताओं के आवेदन जमा हुए और कितने नाम जोड़े गए। विभाग ने परखना भी उचित नहीं समझा कि उक्त आवेदन कहां से मिले और किसने कार्य कर अभियान को सफल बनाया। हकीकत में कलेक्टर कार्यालय में बनाई गई विधानसभावार एकल खिडक़ी पर पूरा दिन कर्मचारी परेशान होते रहते हंै और लोगों की नाराजगी का शिकार होते रहते हंै।

उनकी मेहनत को अनदेखा कर विभाग उनके जमा किए आवेदनों को भी नदारद रहने वाले बीएलओ के खाते में जोडक़र पुरस्कार के समय संख्या अधिक देखकर पुरस्कार की रेवड़ी की तरह बांटता चला आ रहा है। विभाग में कहावत सिद्ध होती है कि अंधा बांटे रेवड़ी और अपने अपनो को दे, इसी कहावत के आधार पर कार्य का आंकलन करने के बजाए संख्या को देखकर 25 जनवरी मतदाता दिवस पर पुरस्कार बांटे जा रहे है। पुरस्कार के समय आज तक किसी ने नहीं देखा कि पुरस्कृत होने वाला बीएलओ केंद्र पर गया या नहीं और उसे उनके द्वारा नोटिस देकर निलंबन तक के लिए धमकाया जा चुका है। कुछ बीएलओ तो इस तरह के रहते हैं जिनके विभाग को वे काम न करने की कह चुके हैं और उनके नाम काटकर किसी अन्य को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीएलओ न होने पर भी वे मानदेय व पुरस्कार तक ले जाते हैं। मानदेय के मामले में भी विभाग वरद हस्त से वितरण करता आ रहा है। बीएलओ बनाने के बाद देखता ही नहीं कि काम किया या नहीं उसके खाते में राशि डालकर ही चैन लेता है।

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