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दिल्ली आनाज मंडी चुनाव में आप समर्थकों ने जीती 18 में 14 सीटें

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नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) चुनाव में 14 सीटों के रुप में बड़ी सफलता मिली है। जानकार इसे व्यापारियों के नोटबंद से परेशान होना एक बड़ी वजह मान रहे हैं। दरअसल मंडी समिति के चुनाव में 18 सीटों में से आप के 14 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। इन सभी नवनिर्वाचित सदस्यों ने मंगलवार को दिल्ली सरकार में शहरी विकास मंत्री गोपाल राय और आप के दिल्ली संयोजक दिलीप पांडेय से मुलाकात की। इस चुनाव की पूरी जिम्मेदारी आप ने आदिल अहमद खान को दी थी। जो लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं और मंडियों से जुड़े कामों को देखते हैं।

आदिल अहमद खान के अनुसार दिल्ली कृषि मार्केटिंग बोर्ड (डीएमएमबी) से आम आदमी पार्टी के समर्थक मीठा राम जीते हैं। पहले यह सीट कांग्रेस के पास थी। एपीएमसी आजादपुर मंडी की तीन सीटों में से दो पर आप समर्थक जीते हैं। पहले यहां की तीनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था। एपीएमसी गाजीपुर (सब्जीमंडी) से आप समर्थक मुकेश धींगरा और जगदीश बजाज जीते हैं। यहां की दोनों की सीटों पर कांग्रेस चुनाव जीती है। वहीं एपीएमसी गाजीपुर (फूलमंडी) से दो सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था। इस बार एक सीट आप के समर्थक किशन कुमार ने जीती है। इसके साथ ही एपीएमसी नरेला से तीनों सीटों पर कांग्रेस कब्जा था लेकिन इस बार अरुण कुमार, रंजीत कुमार, राम कुमार ने जीत दर्ज की है। ये तीनों ही आप के समर्थक हैं।

एपीएमसी नजफगढ़ से तीन सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था लेकिन इस बार दो सीटों पर विजय कुमार गुप्ता और बलबीर ने चुनाव जीता है। दोनों आप के समर्थक हैं। एपीएमसी केशवपुर से तीनों ही सीटों पर आप समर्थक जीते हैं। इनके नाम जय प्रकाश असनानी, अजय चौधरी, मदनलाल पवार हैं। वहीं एपीएमसी मुर्गामंडी से दो सीटों पर 2013 में चुनाव में हुए थे। जिन प्रत्याशियों ने चुनाव जीता था वो आप सदस्य हैं। इस चुनाव में हरेक मंडी के सदस्य और व्यापारी वोट डालते हैं।

चुने हुए लोग मंडियों के कामकाज का संचालन करते हैं। इससे पहले नोटबंदी के मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आजादपुर मंडी में ही एक बड़ी रैली की थी, जिसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुई थीं। जिसमें मुख्यमंत्री केजरीवाल का विरोध तक हुआ था लेकिन अब मंडी समिति के चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि नोटबंदी के बाद से जमीनी स्तर पर व्यापारी भाजपा से छिटक चुका है। जानकार ऐसा मानते हैं कि मंडी समिति के चुनावों का एमसीडी चुनाव पर बड़ा असर पड़ता है। खास बात ये है कि दिल्ली में निगम चुनाव अगले साल ही होने हैं।

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